मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका में एसीबी की बड़ी कार्यवाही रिश्वत लेने के मामले में सीएमओ और एकाउंटेंट गिरफ्तार

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मनेन्द्रगढ़। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और एकाउंटेंट को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्यवाही से नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मच गया वहीं पूरे क्षेत्र में घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी की टीम ने सोमवार की दोपहर योजनाबद्ध तरीके से यह ट्रैप कार्यवाही की। डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने पहले से जाल बिछाया था। जैसे ही रिश्वत की राशि का लेन-देन हुआ तो टीम ने तत्काल दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। कार्यवाही के बाद आरोपियों को पूछताछ के लिये अंबिकापुर ले जाया गया है जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जायेगी।

मामले में पीड़ित और शिकायतकर्ता ठेकेदार चंद्रमणी वर्मा ने बताया कि उसने नगर पालिका के दो वार्डों में सीसी रोड निर्माण कार्य पूरा किया था। इसके अलावा करीब 19 लाख 65 हजार रुपयों की लागत से रिटर्निंग वॉल का निर्माण भी कराया था। कार्य पूर्ण होने के बावजूद उसका फाइनल बिल पास नहीं किया जा रहा था और उसे लगातार टालमटोल किया जा रहा था। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि बिल पास करने के एवज में उससे 53 हजार रुपये कमीशन की मांग की गई थी। वह पहले ही 20 हजार रुपए दे चुका था लेकिन इसके बाद भी उसे परेशान किया जा रहा था। आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव के चलते उसने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद एसीबी ने जांच कर ट्रैप की योजना बनाई और ठेकेदार को शेष 33 हजार रुपये देने के लिये कहा गया। जब वह रकम लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंचा तो सीएमओ ने सीधे पैसा लेने से मना करते हुए उसे एकाउंटेंट को देने को कहा। जैसे ही ठेकेदार ने एकाउंटेंट को राशि सौंपी, मौके पर मौजूद एसीबी टीम ने दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्यवाही के बाद नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारियों में दहशत फैल गई वहीं आम नागरिकों ने इस कार्यवाही का स्वागत किया है क्योंकि लंबे समय से यहां भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही थीं।

फिलहाल एसीबी की टीम आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या पहले भी इस प्रकार ठेकेदारों से अवैध वसूली की जाती रही है। यह कार्यवाही एक बार फिर यह संकेत देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में एजेंसियां सख्ती बरत रही हैं और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा।

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