संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में आज मौसम ने अचानक करवट लेते हुए समूचे वातावरण को शीतलता और सौंदर्य से सराबोर कर दिया । सुबह से ही आसमान में घिर आए काले घने बादलों ने जैसे ही झमाझम वर्षा का रूप लिया वैसे ही प्रकृति ने अपना मनोहारी रूप बिखेरना शुरू कर दिया ।
बारिश की रिमझिम फुहारों ने जहां एक ओर तपती धूप और उमस से राहत दिलाई वहीं दूसरी ओर वनांचल से घिरे अमरकंटक के हरित अंचल को नई ताजगी और जीवन्तता प्रदान कर दी । सड़कों , पहाड़ियों और पेड़ों पर गिरती वर्षा की बूंदें मानो प्रकृति के सुरम्य संगीत का सृजन कर रही थीं जिसे देख स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ पर्यटक भी आनंदित हो उठे ।
अमरकंटक जो कि मां नर्मदा की उद्गम स्थली के रूप में विख्यात है वहां की यह वर्षा वातावरण को और भी अधिक पवित्र एवं शीतल बना रही है । मंदिरों की घंटियों की ध्वनि और वर्षा की बूंदों की झंकार ने मिलकर एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण कर दिया ।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी और उमस से जनजीवन प्रभावित हो रहा था ऐसे में यह वर्षा किसी राहत की सौगात से कम नहीं है । किसानों के चेहरे पर भी खुशी की झलक साफ दिखाई दी क्योंकि यह बारिश फसलों के लिए लाभकारी मानी जा रही है ।
वहीं मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में भी इसी प्रकार का मौसम बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिससे क्षेत्र में तापमान में और गिरावट आ सकती है ।
चैत्र नवरात्रि प्रारंभ का आज प्रथम दिवस है जो हिंदू नव वर्ष के रूप में भी माना जाता है । आज ही मौसम का बनना और बारिश होना काफी शुभ संकेत कहा जा रहा ।
अमरकंटक की वादियों में बिखरी यह बारिश न केवल मौसम को सुहावना बना रही है बल्कि लोगों के मन को भी आनंद और सुकून से भर रही है । प्रकृति का यह रूप मानो यह संदेश दे रहा है कि बदलाव ही जीवन की सबसे सुंदर सच्चाई है ।







