संगीत से मिलता है मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य का आधार अशांत मन को सुकून देता है संगीत, अवचेतन से जुड़कर जीवन में लाता है सकारात्मक बदलाव

---Advertisement---

संगीत से मिलता है मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य का आधार
अशांत मन को सुकून देता है संगीत, अवचेतन से जुड़कर जीवन में लाता है सकारात्मक बदलाव

ब्यूरो रिपोर्ट – शैलेंद्र जोशी

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में संगीत एक ऐसी प्रभावी विधा के रूप में सामने आया है, जो मन और मस्तिष्क को शांति प्रदान करने के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉ. दीपक जैन (घाटाबिल्लोद) के अनुभव तथा विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में किए गए शोधों के आधार पर यह सामने आया है कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में नियमित रूप से कुछ समय संगीत को देता है, तो उसके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं।

ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन, फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी, आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी, आईआईटी कानपुर, यूएच कोनर होल हेल्थ, मैकगिल यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए शोध बताते हैं कि संगीत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। संगीत सुनने से शरीर में तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कोर्टिसोल कम हो जाता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार सोने से पहले हल्का और मधुर संगीत सुनने से अनिद्रा की समस्या कम होती है और गहरी नींद आती है। संगीत मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करता है, जो सीखने और याददाश्त से जुड़े होते हैं, जिससे स्मरण शक्ति में सुधार होता है।

पढ़ाई या काम करते समय हल्का शास्त्रीय या लो-फाई संगीत सुनने से एकाग्रता बढ़ती है और कार्य करने की क्षमता में सुधार आता है। संगीत चिकित्सा को पुराने दर्द को कम करने में भी सहायक माना गया है, क्योंकि यह व्यक्ति का ध्यान दर्द से हटाकर मानसिक राहत प्रदान करती है।

उत्साहजनक और प्रेरणादायक संगीत सुनने से अवसाद और उदासी कम होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही संगीत सुनने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और हृदय गति सामान्य बनी रहती है, जिससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।

तेज लय वाला संगीत व्यायाम के दौरान थकान को कम करता है और प्रदर्शन को बढ़ाता है। संगीत सुनने पर मस्तिष्क में डोपामाइन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे खुशी और संतोष का अनुभव होता है।

वाद्य यंत्र बजाना या संगीत सीखना पूरे मस्तिष्क के लिए एक प्रकार की कसरत के समान माना जाता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपनी भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त कर पाता है। कई बार जो भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं हो पातीं, उन्हें संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया जा सकता है।

शोध यह भी बताते हैं कि जटिल सर्जरी से पहले संगीत सुनने से मरीजों की चिंता और घबराहट कम हो जाती है। इसके अलावा संगीत सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाता है, रचनात्मकता को विकसित करता है और नई भाषा सीखने में भी सहायक होता है।

सुखद संगीत सुनने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे बीमारियों से लड़ने की शक्ति मजबूत होती है। स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों में भी संगीत सुनने से बोलने और शरीर की गतिविधियों में सुधार देखा गया है।

संगीत का अभ्यास व्यक्ति में धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाता है। वहीं अकेलेपन की स्थिति में संगीत एक सच्चे साथी की तरह मन को सहारा देता है और व्यक्ति को सकारात्मक बनाए रखता है।

डॉ. दीपक जैन के अनुसार यदि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़े समय के लिए भी संगीत को स्थान देता है, तो यह मानसिक शांति, संतुलन और आनंद का माध्यम बन सकता है।

अंत में वे कहते हैं कि जीवन की व्यस्तता के बीच भी संगीत को समय देना चाहिए, क्योंकि यह मन और आत्मा को जोड़ने का सबसे सरल माध्यम है।

“गीत गाता चल ओ साथी, गुनगुनाता चल।”

डॉ. दीपक जैन, घाटाबिल्लोद

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

March 11, 2026

March 11, 2026

March 11, 2026

March 11, 2026

March 11, 2026

March 11, 2026

Leave a Comment