संघ की राजभाषा नीति पर आईजीएनटीयू में परिचर्चा आयोजित
अमरकंटक। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी माह-2026 के अंतर्गत ‘संघ की राजभाषा नीति’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा के उद्घाटन सत्र में राजभाषा प्रकोष्ठ की हिंदी अधिकारी एवं हिंदी माह-2026 की समन्वयक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए परिचर्चा के विषय की पृष्ठभूमि एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला
परिचर्चा के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आलोक श्रोत्रिय, प्राध्यापक, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विज्ञान विभाग ने संविधान में उल्लिखित राजभाषा संबंधी प्रावधानों एवं राजभाषा अधिनियम के ऐतिहासिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भारत में राजभाषा के परिप्रेक्ष्य में ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ क्षेत्रों के विभाजन तथा इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।परिचर्चा में आमंत्रित वक्ताओं के रूप में प्रो. एम.टी.वी. नागराजू (प्राध्यापक, शिक्षा विभाग), प्रो. राघवेन्द्र मिश्र (प्राध्यापक, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग), डॉ. दिग्विजय फुकान (सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, समाज कार्य विभाग), डॉ. राकेश सोनी (सहायक प्राध्यापक, दर्शनशास्त्र विभाग), डॉ. वीरेन्द्र प्रताप (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग) तथा डॉ. सौरभ कुमार (सहायक प्राध्यापक, भाषाविज्ञान एवं जनजातीय भाषाओं का व्यतिरेकी अध्ययन विभाग) ने सहभागिता की
उपर्युक्त वक्ताओं ने विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों, प्रश्नपत्रों एवं अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक सामग्री को द्विभाषी रूप में तैयार एवं जारी करने, अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न माध्यमों से हिंदी की व्यावहारिक पहुँच के विस्तार तथा राजभाषा के क्षेत्रवार विभाजन के व्यावहारिक पक्षों पर विचार व्यक्त किए। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर हिंदी के मौखिक एवं लिखित प्रयोग में दिखाई देने वाले अंतर तथा राजभाषा प्रकोष्ठ के माध्यम से परिचर्चा से प्राप्त सारगर्भित सुझावों को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार तक प्रेषित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई
परिचर्चा के दौरान उपस्थित शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों से भी सुझाव आमंत्रित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीरेन्द्र प्रताप, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग द्वारा किया गया। हिंदी माह-2026 के अंतर्गत आयोजित इस परिचर्चा में डॉ. के. वेंकटेसन (सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग), डॉ. के. सुमन (सहायक प्राध्यापक, भाषाविज्ञान एवं जनजातीय भाषाओं का व्यतिरेकी अध्ययन विभाग) सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों के शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की। परिचर्चा का समापन डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, हिंदी अधिकारी द्वारा अध्यक्ष महोदय, समस्त अतिथियों, वक्ताओं, शोध अध्येताओं एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।







































































