शरद पूर्णिमा आज: पंचायती मंदिर और शिवसागर धाम में गूंजेंगे भजन-कीर्तन, चंद्रमा की रोशनी में बंटेगा खीर का प्रसाद

---Advertisement---

शरद पूर्णिमा आज: पंचायती मंदिर और शिवसागर धाम में गूंजेंगे भजन-कीर्तन, चंद्रमा की रोशनी में बंटेगा खीर का प्रसाद

विशेष पूजा-अर्चना, भगवान भोलेनाथ का आकर्षक श्रृंगार और महाआरती के होंगे आयोजन, पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह

रिपोर्टर: भरत मिश्रा, कोतमा

कोतमा। शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार को नगर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर कोतमा के प्रमुख धार्मिक स्थलों पंचायती मंदिर, शिवसागर धाम सहित विभिन्न शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना, भगवान भोलेनाथ का अभिषेक, आकर्षक श्रृंगार और महाआरती के कार्यक्रम होंगे। धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इसी मान्यता के चलते लोग शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखकर अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कोतमा में भी वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन श्रद्धा के साथ किया जाएगा।

पंचायती मंदिर और शिवसागर धाम में होंगे विशेष आयोजन

नगर के पंचायती मंदिर और शिवसागर धाम में शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। मंदिरों में सुबह से पूजा-पाठ और आरती के साथ भक्तिमय वातावरण रहेगा। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं, शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का विशेष अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। महाआरती के दौरान श्रद्धालु भगवान की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।

शाम होते ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। धार्मिक स्थलों पर भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान का गुणगान किया जाएगा। पर्व के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का माहौल रहेगा।

चंद्रमा की चांदनी में रखी जाएगी खीर, श्रद्धालुओं को मिलेगा प्रसाद

पंचायती मंदिर के पुजारी कुंज बिहारी मिश्रा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी आस्था के चलते इस दिन खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखी जाती है और बाद में उसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि पंचायती मंदिर और शिवसागर धाम में देर रात तक भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद चांदनी में रखी गई विशेष खीर का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा। इस परंपरा में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ पर्व मनाएंगे।

धर्मप्रेमियों से आयोजन में शामिल होने की अपील

शरद पूर्णिमा को लेकर नगर के धार्मिक स्थलों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर समितियों के पदाधिकारियों ने नगर के सभी धर्मप्रेमियों से पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है। पर्व के अवसर पर मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल रहने की उम्मीद है।

शरद पूर्णिमा का यह पर्व धार्मिक आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। कोतमा में पंचायती मंदिर, शिवसागर धाम और अन्य शिवालयों में होने वाले आयोजन नगर के धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

Leave a Comment