साहित्य, संस्कार और बाल प्रतिभाओं का स्वर
बाल साहित्य उत्सव में रचनाकारों ने बच्चों को दिखाई सृजन और सपनों की राह, पूर्णेन्दु कुमार सिंह “सुदीर्घ साधना
सम्मान-2026” से सम्मानित
उमरिया — गांधी जयंती और विश्व अहिंसा दिवस के पावन अवसर पर मऊ, ब्यौहारी के सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल स्कूल का परिसर साहित्य और संस्कारों की रोशनी से जगमगा उठा। 2 अक्टूबर 2026 को पंडित रमाविलास सेवा संस्थान द्वारा आयोजित बाल साहित्य उत्सव एवं सुदीर्घ साधना सम्मान समारोह में बच्चों की तुतलाती कविताओं से लेकर वरिष्ठ रचनाकारों की गजलों तक, हर स्वर में सृजन का उत्सव गूंजा।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संस्थान के संस्थापक पंडित रमाविलास जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध रचनाकार श्री रामनिहोर तिवारी, बल्होड, उमरिया मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता अखिल भारतीय ब्राह्मण सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्री संतोष उपाध्याय ने की। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और पत्रकार श्री संतोष द्विवेदी “लोकनाथ” रहे। स्वागत भाषण हिंदी साहित्य सम्मेलन ब्यौहारी इकाई के अध्यक्ष श्री शिवपाल तिवारी ने दिया और पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन उमरिया के प्रसिद्ध गजलकार श्री राजकुमार महोबिया ने किया।
चार दशक की साधना को मिला सम्मान
समारोह का सबसे भावुक क्षण रहा “सुदीर्घ साधना सम्मान-2026”। साहित्य के क्षेत्र में चार दशकों से अनवरत सक्रिय वरिष्ठ गजलकार श्री पूर्णेन्दु कुमार सिंह को इस वर्ष के इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिन्ह पाकर श्री सिंह ने बाल साहित्य के महत्व पर सारगर्भित उद्बोधन दिया और अपनी गजलों से पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया।
सात स्कूलों के नन्हे कवियों ने जीता दिल
बाल काव्य-पाठ प्रतियोगिता इस उत्सव की आत्मा रही। जवाहर नवोदय विद्यालय, क्रिस्ता ज्योति मिशन स्कूल, सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल, गांधी मेमोरियल विद्यालय, विवेकानंद उच्च विद्यालय, सुन्नीबाई केशरवानी विद्यालय और संदीपनी विद्यालय के बच्चों ने मंच पर ऐसी आत्मविश्वास भरी प्रस्तुति दी कि बड़े-बड़े कवि भी दंग रह गए।
प्रतियोगिता में *प्रथम स्थान सेंट्रल एकेडमी इंटरनेशनल, द्वितीय स्थान क्रिस्ता ज्योति मिशन स्कूल और तृतीय स्थान जवाहर नवोदय विद्यालय* ने प्राप्त किया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे मंच बच्चों में कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति की क्षमता को पंख देते हैं।
कवियों की महफिल में बंधा समां
बाल मंच के बाद वरिष्ठ रचनाकारों ने मोर्चा संभाला। अरुण पयासी, शिवपाल तिवारी, कैलाश हलवाई, राजकुमार महोबिया, विभूति तिवारी, मिथिलेश राय, गोपी नवीन शुक्ला, शिवानंद पटेल, सरोज पांडेय, अश्विनी तिवारी, टी.के. सिंह, दीपक कुमार गुप्ता, शरद तिवारी सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
शहडोल की श्रीमती गोपी नवीन शुक्ला ने “बच्चे चित्र बना रहे हैं” सुनाकर बाल कल्पना को रंग दिए, तो बाणसागर के दीपक कुमार गुप्ता ने “संघर्ष कड़ा है, मेहनत का फल और होगा…” से संघर्ष का मंत्र दिया। राजकुमार महोबिया ने गुनगुनाया – “बच्चे कब से पंख उगाए बैठे हैं” तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
गांधी दर्शन प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम स्थल पर लगी गांधी जीवन-दर्शन प्रदर्शनी बच्चों के लिए विशेष आकर्षण रही। चरखा, हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां, दांडी मार्च, चंपारण सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन के दुर्लभ चित्रों और लघु फिल्म के माध्यम से बच्चों ने गांधी को जिया। “वैष्णव जन तो तेने कहिए” की भावपूर्ण प्रस्तुति ने सबको भावुक कर दिया।
डॉ. अरुण कुमार पयासी “बघेली बंधव” ने आयोजक रवि मिश्रा के शिक्षा और बघेली भाषा के प्रयासों को अपनी कविता “शिक्षा के रवि, श्री रवि मिश्रा…” से सराहा।
कार्यक्रम में लालबहादुर सिंह, रामबदन पांडेय, रोशन नागपाल, रामबहोर तिवारी, मो. चांद खान, सूर्यभान यादव, अरुण तिवारी, जवाहर पांडेय, कौशलेन्द्र सिंह, हरिशरण द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, शिक्षक और अभिभावक मौजूद रहे।
अंत में आयोजक रवि मिश्रा ने कहा कि इस उत्सव का उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि बच्चों में साहित्यिक चेतना और मानवीय संवेदना को जगाना है। देर शाम तक कविताओं से सराबोर इस परिसर ने एक ही संदेश दिया – अगर बच्चों को सृजन के लिए मंच मिले, तो वे पूरे समाज का भविष्य बदल सकते हैं।







































































