पुलिस मुख्यालय के आदेशों की अनदेखी? वर्षों से एक ही थाने में जमे कई पुलिसकर्मी

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पुलिस मुख्यालय के आदेशों की अनदेखी? वर्षों से एक ही थाने में जमे कई पुलिसकर्मी

तबादला आदेश जारी होने के बाद संशोधन की चर्चा, देवहरा और फुनगा के मामलों ने बढ़ाई विभागीय पारदर्शिता पर चिंता

रिपोर्टर भरत मिश्रा, कोतमा

अनूपपुर। जिले में पुलिसकर्मियों की लंबे समय से एक ही थाना, चौकी अथवा पुलिस सहायता केंद्र में पदस्थापना को लेकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस मुख्यालय की स्थानांतरण नीति का उद्देश्य लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण कर प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है। इसके बावजूद जिले के विभिन्न थानों और चौकियों में कई पुलिसकर्मियों के वर्षों से एक ही स्थान पर जमे होने की जानकारी सामने आ रही है।

तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही जगह पदस्थ होने का दावा

स्थानीय सूत्रों के अनुसार अनूपपुर जिले के कई थानों में आरक्षक, प्रधान आरक्षक, सहायक उप निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। कुछ कर्मचारियों के तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही थाना क्षेत्र में पदस्थ होने की चर्चा है। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहने से स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान और संपर्क मजबूत होने की बात भी सामने आ रही है।

हालांकि, किन कर्मचारियों की पदस्थापना कितने समय से किस थाने में है, इसकी आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में पुलिस विभाग द्वारा थाना और चौकीवार पदस्थापना अवधि की जानकारी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थापना से व्यवस्था पर सवाल

पुलिस विभाग में लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक स्तर पर स्थानांतरण किए जाते रहे हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को स्थानीय प्रभाव से दूर रखना, कार्यप्रणाली में निष्पक्षता बनाए रखना और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना होता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही थाना क्षेत्र में पदस्थ रहता है तो उसके स्थानीय स्तर पर प्रभाव और संपर्क बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में शिकायतों और पुलिस कार्रवाई को लेकर आम नागरिकों के बीच निष्पक्षता का भरोसा बनाए रखना वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

तबादला आदेश और बाद में संशोधन की चर्चा

इसी बीच जिले में कुछ पुलिस अधिकारियों और प्रभारियों के स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद उनमें संशोधन किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार देवहरा पुलिस सहायता केंद्र और फुनगा चौकी के प्रभारियों के स्थानांतरण अन्य स्थानों के लिए किए गए थे, लेकिन बाद में संशोधित आदेश जारी कर उन्हें यथावत रखे जाने की बात कही जा रही है।

यदि ऐसा हुआ है तो स्थानांतरण आदेशों में संशोधन का आधार क्या रहा और किन प्रशासनिक कारणों से अधिकारियों को यथावत रखा गया, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

बार-बार संशोधन से पारदर्शिता पर उठे सवाल

तबादला सूची जारी होने के बाद उसमें बदलाव अथवा आदेश निरस्त किए जाने की स्थिति में विभागीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी को प्रशासनिक आवश्यकता के कारण यथावत रखा गया है तो उसका स्पष्ट कारण भी सामने आना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के पालन की मांग

क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि अनूपपुर जिले के सभी थानों, चौकियों और पुलिस सहायता केंद्रों में पदस्थ पुलिसकर्मियों की पदस्थापना अवधि की समीक्षा कराई जाए। तीन वर्ष अथवा निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों की सूची तैयार कर नियमानुसार स्थानांतरण की कार्रवाई की जाए।

साथ ही जिन स्थानांतरण आदेशों में बाद में संशोधन किया गया है, उनके कारणों और प्रशासनिक आधार को भी स्पष्ट किया जाए। नागरिकों का कहना है कि पुलिस विभाग में पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था से ही आम जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास मजबूत बना रह सकता है।

जवाबदेही जरूरी

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि निर्धारित अवधि से अधिक समय से कर्मचारी एक ही स्थान पर पदस्थ हैं तो उनकी पदस्थापना की समीक्षा क्यों नहीं हुई? वहीं, यदि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद उन्हें संशोधित कर यथावत रखा गया है तो इसके पीछे क्या प्रशासनिक कारण रहे हैं? इन सवालों पर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।

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