मूक-बधिर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई नींव

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मूक-बधिर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई नींव

स्कूल- कॉलेज का भूमि पूजन, छात्रावास का लोकार्पण; शिक्षा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़ेंगे दिव्यांग बच्चे

कोईलांचल समाचार के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

शैलेंद्र जोशी, धार

धार। मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में शुक्रवार को धार जिले के धरमपुरी तहसील अंतर्गत ग्राम तारापुर (चंदाबड़) में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आनंद सर्विस सोसाइटी द्वारा मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास, शिक्षा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य से स्कूल, कॉलेज एवं पुनर्वास केंद्र निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया। वहीं काली बावड़ी में मूक-बधिर बालक छात्रावास का लोकार्पण भी गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक कालू सिंह ठाकुर ने भूमि पूजन कर संस्थान की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना समाज की सच्ची सेवा है। ऐसे बच्चों को अवसर देकर ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। विधायक ठाकुर ने संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए विधायक निधि से 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि प्रदीप सोनी, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण धार ने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए हरसंभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने साइन लैंग्वेज के माध्यम से बच्चों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों से उनका आत्मीय संवाद कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।

आनंद सर्विस सोसाइटी के सचिव ज्ञानेंद्र मोनिका पुरोहित ने बताया कि संस्था लंबे समय से मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इस उद्देश्य से छात्रावास को प्राथमिकता के आधार पर प्रारंभ किया गया है। इससे दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी अंचलों से आने वाले मूक-बधिर बच्चे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित स्कूल, कॉलेज एवं पुनर्वास केंद्र के माध्यम से बच्चों को केवल औपचारिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, विशेष प्रशिक्षण, संवाद क्षमता, पुनर्वास सेवाएं और रोजगारोन्मुख मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह संस्थान भविष्य में मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के लिए क्षेत्र का एक समर्पित शैक्षणिक एवं पुनर्वास केंद्र बनेगा।

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, अभिभावकों एवं स्थानीय ग्रामीणों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सभी ने संस्था की इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए इसे दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

ग्राम तारापुर और काली बावड़ी में संपन्न यह आयोजन न केवल एक संस्थान की शुरुआत है, बल्कि उन बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का प्रयास भी है, जो अब तक संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते थे। यह पहल निश्चित रूप से मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखेगी।

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