कोतमा में सजा साहित्य और कविता का अनूठा मंच, राष्ट्रीय रचनाकारों ने बांधा समां
दो दिवसीय ‘कोतमा साहित्य उत्सव’ का भव्य शुभारंभ, उदय प्रकाश का हुआ विशेष सम्मान
रिपोर्टर : भरत मिश्रा, कोतमा
कोतमा। मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, जिला इकाई अनूपपुर के तत्वावधान में कोतमा नगर के अग्रसेन भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘कोतमा साहित्य उत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। साहित्य, कविता, संस्कृति और प्रकृति के विविध रंगों से सजे इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। आयोजन ने कोतमा की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
सोन नदी के तट से हुई आयोजन की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत 26 सितंबर की सुबह प्रख्यात कथाकार उदय प्रकाश के गृह ग्राम सीतापुर के भ्रमण से हुई। साहित्यकारों एवं अतिथियों ने सोन नदी के तट पर अनौपचारिक संवाद किया। इस दौरान वृक्षारोपण भी किया गया। साहित्य और प्रकृति के इस संगम ने आयोजन की शुरुआत को विशेष बना दिया।
इसके पश्चात दोपहर 3 बजे कोतमा के अग्रसेन भवन में मुख्य कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों एवं रचनाकारों ने सहभागिता की।
उदय प्रकाश का विशेष सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ख्यातिलब्ध कवि एवं कथाकार उदय प्रकाश का विशेष सम्मान किया गया। अतिथियों ने साहित्य की सामाजिक भूमिका, हिंदी भाषा के विस्तार तथा नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर नई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. सदानंद शाही, डॉ. मुकेश कुमार, पलाश सुरजन और रामराव वामनकर सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार एवं रचनाकार उपस्थित रहे। साहित्यकारों के विचारों और संवाद ने आयोजन को वैचारिक गहराई प्रदान की।
कवि सम्मेलन में बही कविता की रसधार
सांध्यकालीन सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे नामी कवियों और कहानीकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन जीवन के विभिन्न पहलुओं को शब्द दिए।
इंदौर से तरुण भटनागर, भोपाल से रामराव वामनकर और मनीष वैद्य सहित स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कई प्रतिष्ठित रचनाकारों ने कविता पाठ और साहित्यिक संवाद में हिस्सा लिया। कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
साहित्य, प्रकृति और संस्कृति को जोड़ने का प्रयास
आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा एवं साहित्य के साथ प्रकृति और संस्कृति से जुड़े सरोकारों को आमजन तक पहुंचाना तथा नई पीढ़ी को साहित्य सृजन के लिए प्रेरित करना रहा। आयोजकों ने साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे समाज, प्रकृति और आम जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।
कोतमा को मिली नई साहित्यिक पहचान
दो दिवसीय राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन ने कोतमा में साहित्य प्रेमियों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया, जहां देशभर के रचनाकारों के साथ सीधे संवाद और उनकी रचनाओं को सुनने का अवसर मिला। स्थानीय नागरिकों और साहित्य प्रेमियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल बताया।
‘कोतमा साहित्य उत्सव’ के माध्यम से कोतमा ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि छोटे शहरों और कस्बों में साहित्यिक चेतना को मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।







































































