हेलमेट अभियान या अवैध वसूली का खेल? सड़क सुरक्षा के नाम पर गरीबों की घेराबंदी, हाईवे पर ‘यमराज’ बनी यातायात पुलिस

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हेलमेट अभियान या अवैध वसूली का खेल?

सड़क सुरक्षा के नाम पर गरीबों की घेराबंदी, हाईवे पर ‘यमराज’ बनी यातायात पुलिस

कोतमा–अनूपपुर मार्ग पर हेलमेट जांच के बहाने वसूली के आरोप, यातायात प्रभारी विनोद दुबे पर उठे गंभीर सवाल

अनूपपुर जिले में 26 अप्रैल से 10 मई तक चलाए जा रहे हेलमेट जांच विशेष अभियान को लेकर जहां एक ओर पुलिस प्रशासन इसे सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर आमजन के बीच इस अभियान को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है कोतमा से अनूपपुर मार्ग, विशेषकर नेशनल हाईवे-43 पर हालात ऐसे बन गए हैं कि हेलमेट जांच अभियान अब सड़क सुरक्षा से ज्यादा अवैध वसूली का जरिया नजर आने लगा है

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यातायात पुलिस कोतमा–अनूपपुर मार्ग पर इस तरह तैनात रहती है मानो सड़क सुरक्षा नहीं, बल्कि राहगीरों की घेराबंदी की जा रही हो सड़क किनारे खड़े पुलिसकर्मी दोपहिया चालकों को रोकने के नाम पर ऐसे खौफ का माहौल बना देते हैं कि आमजन उन्हें ‘यमराज’ तक कहने लगे हैं सबसे अधिक परेशानी उन गरीब तबके के लोगों को उठानी पड़ रही है, जो रोजी-रोटी के लिए इसी मार्ग से गुजरते हैं

कभी सब्जी बेचने वाला अपनी ठेली लेकर घंटों खड़ा दिखाई देता है, तो कभी दूध बेचने वाला देरी से परेशान नजर आता है। ऑटो चालक, छोटे व्यापारी, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोग सड़क किनारे लंबी कतारों में खड़े इंतजार करते रहते हैं कि कब पुलिस हटे और वे आगे निकल सकें स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात पुलिस की यह सख्ती नियम पालन से अधिक गरीबों पर दबाव बनाने का जरिया बन चुकी है

सबसे अधिक सवाल यातायात प्रभारी विनोद दुबे की कार्यशैली को लेकर उठ रहे हैं आरोप है कि जब से विनोद दुबे को यातायात प्रभारी बनाया गया है, जिले की यातायात व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो गई है सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और दुर्घटना रोकथाम के नाम पर चल रही कार्रवाई अब आमजन के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बन गई है

आरोप यह भी हैं कि विनोद दुबे को यातायात प्रभारी के साथ-साथ हाईवे चौकी फुनगा का भी प्रभारी बनाए जाने के बाद हालात और बिगड़े हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर दिन-रात ओवरलोड वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिए जाने की चर्चा आम है यही कारण है कि छोटे वाहन चालकों पर सख्ती और बड़े वाहनों पर नरमी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि हाईवे पर अवैध ओवरलोड वाहनों का संचालन बिना संरक्षण के संभव नहीं है कोयला, रेत और अन्य भारी मालवाहक वाहन खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं, लेकिन कार्रवाई का डंडा केवल हेलमेट न पहनने वाले गरीब, मजदूर और छोटे वाहन चालकों पर ही चलता दिखाई देता है

इसी अव्यवस्था और कथित मिलीभगत का एक गंभीर उदाहरण 20 अप्रैल 2026 को सामने आया, जब ट्रक क्रमांक CG 04 RT 8654 के चालक लल्लू कोल, निवासी भालूमाड़ा जो की कटनी से कोयला खाली कर वापस कोतमा लौट रहा था आरोप है कि रास्ते में कार सवार छह लोगों ने ट्रक रोककर चालक के साथ मारपीट की और ट्रक से जबरन 250 लीटर डीजल चोरी कर लिया घटना में चालक को गंभीर चोटें आईं सवाल यह है कि जब हाईवे सुरक्षा की जिम्मेदारी सख्ती से निभाने का दावा किया जा रहा है, तब इस तरह की संगठित वारदातें कैसे हो रही हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस की सक्रियता वास्तव में सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए होती, तो हाईवे पर लूट, डीजल चोरी, ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक दिखाई देती लेकिन वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि हेलमेट अभियान का वास्तविक उद्देश्य सुरक्षा कम और वसूली अधिक बनता जा रहा है

हेलमेट अभियान निस्संदेह सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक है, लेकिन जब यह अभियान निष्पक्षता छोड़कर गरीबों के उत्पीड़न, अवैध वसूली और चुनिंदा कार्रवाई का माध्यम बन जाए, तब इसकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस पूरे अभियान की निष्पक्ष समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि सड़क सुरक्षा के नाम पर आमजन का शोषण न हो

अब देखना यह है कि हेलमेट जांच के नाम पर चल रही इस कार्रवाई को प्रशासन सड़क सुरक्षा का अभियान बनाए रखता है या फिर यह आम जनता की नजर में अवैध वसूली का पर्याय बनकर रह जाएगा

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