बैगा जाति के प्रमाण पत्रों को लेकर शिकायत के बाद जांच शुरू, 55 लोगों पर फर्जी दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने के आरोप
सहायक शिक्षक ने दिया इस्तीफा
एमसीबी। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर शासकीय सेवाओं में नियुक्ति हासिल करने के मामले में प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पाली से जुड़े इस मामले में पूर्व विधायक भरतपुर सोनहत गुलाब कमरो की शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की है। शिकायत में करीब 55 लोगों द्वारा धीवर जाति के स्थान पर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का प्रमाण पत्र प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है।
गुलाब कमरो ने मामले को लेकर सचिव, अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग के साथ ही बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और एमसीबी जिले के कलेक्टरों को शिकायत भेजी थी। शिकायत में कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी किये गये जाति प्रमाण पत्रों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की मांग की गई थी।
शिकायत के बाद बिलासपुर कलेक्टर द्वारा छह शिकायतों को टीएल प्रकरण के रूप में दर्ज करते हुए जांच शुरू कराई गई है। प्रशासन द्वारा संबंधित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्रों के साथ उनके आधार में प्रस्तुत दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की जा रही है।
एमसीबी में पदस्थ सहायक शिक्षक ने दिया त्यागपत्र
मामले में एमसीबी जिले से भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। शिकायत के बाद यहां पदस्थ एक सहायक शिक्षक द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दिये जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि जाति प्रमाण पत्र की वैधता और उससे संबंधित आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
उच्च स्तरीय छानबीन समिति को भेजी गई रिपोर्ट
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास बिलासपुर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक मामले से संबंधित जांच रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से संचालक/सदस्य, उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति, संचालनालय, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर को भेजी जा चुकी है। फिलहाल मामला राज्य स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के समक्ष प्रक्रियाधीन है। समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों का परीक्षण किये जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी किये गये थे अथवा उनमें अनियमितता या कूटरचना हुई थी।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्यवाही
करीब 55 लोगों से संबंधित बताये जा रहे इस मामले ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिये निर्धारित अधिकारों और शासकीय नियुक्तियों में जाति प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर सवाल खड़े किये हैं। फिलहाल प्रशासनिक और उच्च स्तरीय स्तर पर जांच जारी है। जांच में यदि प्रमाण पत्र नियम विरुद्ध या फर्जी पाये जाते हैं तो संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा सकती है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति के हक पर डाका किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाये जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की मांग की है।




































































