संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक के वार्ड क्रमांक 15 निवासी चांदनी उर्वेती ने अपनी गोंडी चित्रकला से वैश्विक पहचान बना रही है तथा अपनी कला से क्षेत्र का मान बढ़ा रही है ।
क्षेत्र की पारंपरिक आदिवासी कला गोंडी चित्रकला अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी अलग पहचान बना रही है । अमरकंटक निवासी आदिवासी प्रधान समुदाय से जुड़ी कलाकार चांदनी उर्वेति पिछले लगभग 20 वर्षों से अपनी मेहनत , लगन और रचनात्मकता के माध्यम से इस कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटी हैं ।
चांदनी उर्वेति ने वर्ष 2005 से पेंटिंग की शुरुआत की थी । शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी कला को निरंतर निखरती रहीं और आज उनकी बनाई प्रधान गोंड पेंटिंग देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही है । कई स्थानों पर उनके स्टॉल भी लगाए जाते हैं जहां कला प्रेमी उनकी पेंटिंग और चित्रकला को काफी सराहते हैं । उनके कथानुसार कुछ पेंटिंग विदेशों तक भी पहुंच चुकी हैं जो क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है ।
उनकी इस यात्रा में उनके पति राजेंद्र कुमार उर्वेति का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है । दोनों मिलकर अपनी चित्रकला के माध्यम से आदिवासी संस्कृति , परंपराओं और मान्यताओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं । उनकी गोंड पेंटिंग में देवी-देवताओं , प्रकृति , जीव-जंतुओं तथा प्राचीन और आधुनिक कहानियों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है । हर पेंटिंग अपने आप में एक कहानी कहती है जो आदिवासी जीवन शैली और प्रकृति के प्रति जुड़ाव को दर्शाती है ।
अपनी अद्भुत कलाकारी , निरंतर अभ्यास और मेहनत के बल पर चांदनी उर्वेति लगातार एक नई पहचान बना रही हैं । उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिले तो स्थानीय कला भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है । आज वे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं ।

















