26 अक्टूबर को होगी मां त्रिपुर सुंदरी की प्राण प्रतिष्ठा , देश के विभिन्न राज्यों से पहुं रहे श्रद्धालु
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक के सोनमुड़ा मार्ग स्थित श्री यंत्र महामेरु शक्तिपीठ में चार दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 23 अक्टूबर को श्रद्धा , भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रारंभ हुआ । महोत्सव के प्रथम दिन मां त्रिपुर सुंदरी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई । सुसज्जित पालकी में विराजित मां भगवती श्री यंत्र के प्रतीकात्मक स्वरूप एवं कलश के साथ निकली शोभायात्रा में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की । मां के जयकारों से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय हो उठा ।
बनारस एवं दक्षिण भारत से आए पुरोहितों ने वैदिक परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे है । प्रथम दिवस के पूजन एवं धार्मिक कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद शक्तिपीठ परिसर मे अनुष्ठान जारी हैं ।

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर 26 अक्टूबर को मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा एवं महाकुंभाभिषेक और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा । महोत्सव के दौरान पूजन , यज्ञ , अधिवास तथा श्री यंत्र स्थापना से संबंधित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं ।
मुख्य समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निर्धारित धार्मिक विधि-विधान पूरे किए जा रहे है । इस आयोजन में शामिल होने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम जारी है ।
स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज की प्रेरणा से आगे बढ़ रही परंपरा
श्री यंत्र महामेरु शक्तिपीठ के इस धार्मिक आयोजन के प्रेरणास्रोत ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज थे । उनकी आध्यात्मिक प्रेरणा एवं परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान महंत एवं अध्यक्ष स्वामी शरदपुरी जी महाराज के नेतृत्व में महोत्सव का आयोजन समस्त नगरवासियों के सहयोग से किया जा रहा है ।
श्रीविद्या उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है शक्तिपीठ
श्री यंत्र महामेरु शक्तिपीठ श्रीविद्या उपासना की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है । श्री यंत्र को देवी शक्ति , आध्यात्मिक चेतना एवं साधना का प्रतीक माना जा रहा । इसकी विशिष्ट त्रि-आयामी महामेरु संरचना श्रद्धालुओं और साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है । वर्ष 1991 में मंदिर निर्माण प्रारंभ हुआ था तब से अब तक लगभग 35 वर्षों की निर्माण एवं साधना यात्रा के बाद अब प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव मंदिर की धार्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया है ।
मां नर्मदा की पावन उद्गम स्थली अमरकंटक में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है । चार दिवसीय आयोजन के दौरान विशाल शोभायात्रा के साथ पूजन , यज्ञ और वैदिक अनुष्ठानों से नगर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है ।
26 अक्टूबर को होने वाले मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह , महाकुंभाभिषेक एवं पूर्णाहुति के साथ महोत्सव का समापन होगा ।






































































