- रामपुर-बटुरा तबादलों पर मजदूर नेता अख्तर जावेद उस्मानी का प्रहार
- कोल इंडिया की ट्रांसफर नीति के उल्लंघन का आरोप, स्थायी कर्मियों को हटाकर ठेकेदारी बढ़ाने पर सवाल; तबादले रद्द कराने के लिए संघर्ष का ऐलान
अनूपपुर। प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र पांडेय।
कर्म प्रधान विश्व करि राखा।
जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥
रामचरितमानस की चौपाई कर्म की प्रधानता और उसके प्रतिफल का संदेश देती है। इसी संदर्भ में एसईसीएल के सोहागपुर क्षेत्र की रामपुर-बटुरा खदान में स्थायी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर श्रमिक असंतोष बढ़ रहा है। हिन्द मजदूर सभा के प्रतिनिधि एवं कोल इंडिया लिमिटेड के त्रिपक्षीय सेफ्टी बोर्ड सदस्य अख्तर जावेद उस्मानी ने प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि **खदान को खड़ा करने में मजदूरों का पसीना चाहिए, लेकिन उत्पादन की बारी आने पर उन्हीं श्रमिकों को दूरस्थ क्षेत्रों में क्यों भेजा जा रहा है?*
उस्मानी के अनुसार, रामपुर-बटुरा खदान शुरू करने के लिए सोहागपुर क्षेत्र की दूसरी खदानों से विभागीय कर्मचारियों को यहां लाया गया था। इन श्रमिकों ने शुरुआती दौर के कठिन और श्रमसाध्य कार्यों को पूरा करने में योगदान दिया। अब उन्हीं कर्मचारियों को गेवरा सहित अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने और उत्पादन प्रक्रिया में ठेकेदारों की भूमिका बढ़ने पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विभागीय कर्मचारियों की मेहनत से खदान तैयार कराकर बाद में उन्हें हटाना उचित है?
मजदूरों के श्रम की कीमत कौन चुकाएगा?
मजदूर नेता ने आरोप लगाया कि इन तबादलों से सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे वरिष्ठ कर्मचारियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। परिवार से दूरी, आवास की समस्या और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कोल इंडिया की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए तबादले निरस्त करने और संबंधित निर्णयों की समीक्षा की मांग की।
ठेकेदारी नहीं, विभागीय उत्पादन को मिले प्राथमिकता
उस्मानी ने मांग की कि एसईसीएल की मेगा खदानों में अनुपयोगी पड़ी मशीनों का आकलन कर रामपुर-बटुरा में विभागीय पैच चलाया जाए। जरूरत पड़ने पर नई मशीनें खरीदी जाएं, ताकि स्थायी कर्मचारियों के अनुभव और विभागीय संसाधनों का इस्तेमाल उत्पादन में हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभागीय उत्पादन का विकल्प मौजूद है, तो कर्मचारियों को हटाकर ठेकेदारी व्यवस्था के विस्तार की जरूरत क्यों पड़ रही है?
निदेशक मंडल को पत्र, संघर्ष का निर्णय
कोयला मजदूर पंचायत, संबद्ध हिन्द मजदूर सभा, सोहागपुर क्षेत्र की 22 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में तबादले निरस्त कराने, दूसरे क्षेत्रों में ज्वाइन कर चुके कर्मचारियों को रामपुर-बटुरा वापस लाने और विभागीय पैच शुरू करने के लिए संघर्ष का निर्णय लिया गया। पहले चरण में एसईसीएल निदेशक मंडल को पत्र भेजा गया है।
बैठक में विनय सिंह, शिवनारायण मिश्रा, हंसराज तंवर और लवकुश तिवारी सहित संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। उस्मानी ने बताया कि वे जल्द ही सोहागपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक और एसईसीएल निदेशक मंडल से चर्चा करेंगे।
अब सवाल यह है कि प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं और स्थानांतरण नीति के उल्लंघन के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि तबादले रद्द कराने और विभागीय उत्पादन की मांग को लेकर आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।






































































