अनूपपुर, 24 अक्टूबर 2026- दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन एवं खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत ग्राम बैरीबांध, ग्राम पंचायत जमुड़ी, विकासखंड जैतहरी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 16 हितग्राहियों को चना बीज के मिनीकिट वितरित किए गए। साथ ही खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के संबंध में किसानों को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दलहन विकास निदेशालय के संचालक श्री महेश कुमार ने किसानों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में दलहन एवं तिलहन की मांग की तुलना में उत्पादन में कमी के कारण आयात करना पड़ता है। वर्ष 2031 तक दलहन एवं तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन एवं राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने किसानों को बीजों की कतारबद्ध बुवाई अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि सीड ड्रिल एवं डिबलिंग विधि से बुवाई करने पर बीज और उर्वरकों की बचत होती है तथा उत्पादन में वृद्धि की संभावना रहती है।
श्री महेश कुमार ने खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए फसल अवशेषों एवं नरवाई को खेत में ही मिलाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इससे मिट्टी में जैविक कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जो मिट्टी की उर्वरता के लिए महत्वपूर्ण है। कार्बनिक पदार्थ लाभदायक सूक्ष्म जीवों के लिए भोजन का कार्य करते हैं। सूक्ष्म जीव एवं केंचुए मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति बनाए रखने में सहायक होते हैं।
उन्होंने किसानों से नरवाई एवं पराली नहीं जलाने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ नष्ट होते हैं और लाभदायक सूक्ष्म जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने हरी खाद, गोबर की खाद, कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट एवं जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अनूपपुर की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह ने किसानों को स्वयं बीज तैयार करने, जैविक खाद बनाने और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और खेतों की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रखी जा सकती है। रासायनिक पदार्थों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है, इसलिए कृषि में संतुलित एवं टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में जनपद पंचायत सदस्य श्री सुनील एक्का, ग्राम पंचायत जमुड़ी की सरपंच श्रीमती तुलसिया बाई, उपसंचालक कृषि श्री अनुराग पटेल, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री रामाधार मरावी, श्री दान सिंह पट्टा, श्री आर.के. पटले, कृषि विस्तार अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय कृषक उपस्थित रहे।







































































