- ग्राम पंचायत बंडी खुर्द में सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सोहागपुर/शहडोल। ग्राम पंचायत बंडी खुर्द, जनपद पंचायत सोहागपुर में वाटरशेड मिशन के तहत विकसित किए गए उद्यान को उजाड़कर मैदान में तब्दील किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्यान में लगाए गए अनेक फूलदार एवं फलदार वृक्षों को नष्ट कर वहां मैदान बना दिया गया। इस मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर शहडोल की जनसुनवाई में शिकायत भी की गई, लेकिन शिकायत के बाद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बंडी खुर्द में वाटरशेड मिशन के अंतर्गत उद्यान का निर्माण एवं विकास कराया गया था। उद्यान में विभिन्न प्रकार के फूलदार तथा फलदार पौधे लगाए गए थे, जिससे परिसर हराभरा और आकर्षक दिखाई देता था। ग्रामीणों के अनुसार इस उद्यान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरियाली को बढ़ावा देना तथा गांव में विकसित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना था।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव द्वारा उक्त उद्यान को उजाड़कर मैदान का स्वरूप दे दिया गया। इस दौरान उद्यान में लगे कई फूलदार एवं फलदार वृक्षों को भी हटा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान को हरियाली एवं पौधारोपण के लिए विकसित किया गया था, वहां वृक्षों को हटाकर मैदान बनाए जाने से वाटरशेड मिशन के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंची शिकायत
मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा जिला कलेक्टर शहडोल की जनसुनवाई में शिकायत प्रस्तुत कर पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जनसुनवाई में शिकायत दिए जाने के बावजूद अभी तक मौके पर प्रभावी जांच अथवा कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वाटरशेड मिशन के तहत उद्यान निर्माण में खर्च की गई शासकीय राशि, पौधारोपण एवं उनके रखरखाव पर हुए व्यय तथा उद्यान को उजाड़कर मैदान बनाए जाने की अनुमति एवं प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही मौके का निरीक्षण कर यह भी पता लगाया जाए कि उद्यान में लगाए गए पौधों और वृक्षों की वर्तमान स्थिति क्या है तथा उन्हें हटाने का निर्णय किसके आदेश से लिया गया।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा वाटरशेड मिशन के अभिलेखों और पंचायत के प्रस्तावों की जांच की जाए। यदि बिना सक्षम अनुमति के उद्यान को नष्ट कर सरकारी राशि से लगाए गए वृक्षों को हटाया गया है तो जिम्मेदारी निर्धारित कर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से तैयार किए गए सार्वजनिक परिसरों और लगाए गए वृक्षों की सुरक्षा पंचायत की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकसित उद्यान को उजाड़कर मैदान में बदलने के मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि शासकीय योजनाओं में खर्च होने वाली राशि और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का दुरुपयोग न हो।
ग्रामीणों ने कलेक्टर शहडोल से मामले में शीघ्र जांच कराकर उद्यान को पुनः विकसित कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की है।







































































