अनूपपुर डीईओ तुलाराम आर्मो : नाक के नीचे कोतमा में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़, व्यस्त सड़कों पर लावारिस छोड़े जा रहे मासूम!
कोतमा के शिशु भारती स्कूल हेडमास्टर नीलेश मिश्रा का ऑफिस में बैठकर महा-धमाका: “कहाँ है अनूपपुर जिले में कोई शिक्षा व्यवस्था? पूरा सिस्टम ध्वस्त है
अनूपपुर जिले के कोतमा नगर में संचालित निजी स्कूलों की गुंडागर्दी और परिवहन माफिया का जानलेवा खेल अब मासूम बच्चों की जिंदगी के लिए सीधा काल बनता जा रहा है। वार्ड क्रमांक 6, नई बस्ती स्थित ज्योति पेट्रोल टंकी के पास संचालित निजी शिशु भारती इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह से दांव पर लगा दिया गया है। सबसे गंभीर और रूह कँपा देने वाली बात यह है कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था के मुखिया जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तुलाराम आर्मो इस खौफनाक और गैर-कानूनी जमीनी हकीकत से आँखें मूंदे बैठे हैं। अभिभावकों का सीधा आरोप है कि यह पूरी अव्यवस्था बिना प्रशासनिक सांठगांठ के मुमकिन ही नहीं है।
इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब शिशु भारती हायर सेकेंडरी स्कूल के हेडमास्टर नीलेश मिश्रा को उनके ही दफ्तर (ऑफिस) में घेरकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने पूरे अनूपपुर जिले के शिक्षा विभाग की पोल खोल दी। हेडमास्टर नीलेश मिश्रा ने ऑफिस में बैठकर के सामने आक्रोशित लहजे में कहा, “स्कूल में और इस पूरे अनूपपुर जिले में कहाँ है कोई शिक्षा व्यवस्था? मुझे बताइए, यहाँ किसी भी स्कूल की क्या व्यवस्था है? इस पूरे जिले में कोई व्यवस्था नहीं बची है! जब पूरा सिस्टम ही फेल है, तो बच्चों के लिए स्कूलों में क्या व्यवस्था बोली जाए? यहाँ कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।” हेडमास्टर का यह कबूलनामा कि पूरे अनूपपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, यह साबित करता है कि जिला शिक्षा अधिकारी तुलाराम आर्मो का नियंत्रण पूरी तरह खो चुका है।
परिवहन माफिया का यह अत्याचार यहीं खत्म नहीं होता। इन बेरहम वैन चालकों ने भालूमाड़ा , लशुई कैंप, गोविंदा गांव, और गोविंदा कॉलोनी से क्षमता से तीन गुना अधिक बच्चों को वाहनों में जानवरों की तरह ठूंस रखा है। स्कूल का निर्धारित समय सुबह 8:00 से 8:30 बजे का है, लेकिन अंधा मुनाफा कूटने के चक्कर में बच्चों को सुबह 6:00 बजे ही उनके बिस्तरों से जबरन उठा लिया जाता है। इसका भयावह नतीजा यह निकल रहा है कि इन नन्हे बच्चों को स्कूल खुलने से करीब डेढ़ घंटा पहले ही बंद स्कूल परिसर के बाहर लावारिस छोड़ दिया जाता है।सबसे खतरनाक मोड़ दोपहर में छुट्टी के बाद आता है, जब वैन चालक बच्चों को उनके घर के सुरक्षित दरवाजे तक छोड़ने के बजाय मुख्य और व्यस्त सड़कों पर ही लावारिस उतारकर भाग रहे हैं। तेज रफ्तार गाड़ियों और भारी वाहनों के बीच इन सहमे हुए मासूमों को अकेले जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट और आरटीओ की गाइडलाइंस चीख-चीख कर कहती हैं कि जब तक बच्चा सुरक्षित परिजनों को न सौंप दिया जाए, उसकी सुरक्षा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और ड्राइवर की होगी, लेकिन कोतमा में इन नियमों को सरेआम पैरों तले कुचला जा रहा है।इस पूरे संवेदनशील और जानलेवा खेल पर जिला शिक्षा अधिकारी तुलाराम आर्मो की रहस्यमयी चुप्पी पर अब जनता का सीधा और तीखा हमला शुरू हो गया है। क्षेत्र के जागरूक नागरिक और परेशान अभिभावक सीधे डीईओ साहब से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस खतरनाक माफिया राज पर अब तक विभाग का हंटर क्यों नहीं चला? पीड़ित अभिभावकों ने अब साफ चेतावनी दी है कि यदि जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेकर इन लापरवाह स्कूलों और भ्रष्ट ड्राइवरों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो पूरे अनूपपुर जिले में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।







































































