नर्मदा उद्गम की पावनता पर नशाखोरी का ग्रहण ,  शाम ढलते ही नर्मदा किनारे जुटने लगते हैं असामाजिक तत्व

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संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

 

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक जो देश के प्रमुख आध्यात्मिक तीर्थों में शुमार अमरकंटक अपनी धार्मिक आस्था , प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है । प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु , पर्यटक एवं नर्मदा परिक्रमावासी यहां पहुंचकर मां नर्मदा के दर्शन एवं पूजन-अर्चन करते हैं । किंतु हाल के दिनों में नर्मदा तट एवं आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती नशाखोरी की घटनाओं ने इस पवित्र नगरी की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं ।

 

स्थानीय नागरिकों के अनुसार शाम होते ही नर्मदा के दक्षिण तट सहित कुछ सुनसान क्षेत्रों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है । यहां खुलेआम शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं । धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियां श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ पवित्र वातावरण को भी दूषित कर रही हैं ।

 

बताया जाता है कि कुछ लोग वाहनों से पहुंचकर नर्मदा तट और आसपास के मैदानी क्षेत्रों पर मदिरापान करते हैं तथा उपयोग के बाद शराब की बोतलें , प्लास्टिक गिलास ,सिगरेट का कवर , पाउच और अन्य कचरा वहीं छोड़कर चले जाते हैं । इससे न केवल क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण और धार्मिक महत्व वाले स्थलों की छवि भी धूमिल हो रही है ।

 

स्थिति को और गंभीर बनाता है क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को पहुंचाया जा रहा नुकसान ।

 

नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा लगाए गए स्ट्रीट लाइट पोल एवं प्रकाश उपकरणों को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किया जा रहा है । कई स्थानों पर पत्थर मारकर बल्ब और लाइटें तोड़ दी जाती हैं जिससे रात के समय अंधेरा फैल जाता है । यही अंधेरा नशाखोरी और अन्य अवांछित गतिविधियों को बढ़ावा देने का कारण बन रहा है ।

 

सांसद प्रतिनिधि प्रकाश द्विवेदी (विक्की) का कहना है कि नर्मदा तट जैसे संवेदनशील धार्मिक क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त , सीसीटीवी निगरानी एवं प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना अत्यंत आवश्यक है । साथ ही अवैध शराब की बिक्री और नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई कर ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाने चाहिए ।

 

श्रद्धालुओं और नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मां नर्मदा की पावन नगरी की गरिमा, स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए त्वरित एवं ठोस कार्रवाई की जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस तीर्थ की पवित्र पहचान अक्षुण्ण बनी रहे ।

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