वेकोलि एवं महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल के मध्य वाणिज्यिक बांसारोपण हेतु हुआ समझौता

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बल्लारपुर क्षेत्र की सास्ती ओपन कास्ट खदान की ओवर बर्डन डंप पर विकसित होगी वाणिज्यिक बांसारोपण परियोजना

 

नागपुर। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) ने सतत खनन एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल (एमबीडीबी), नागपुर के साथ सस्ती ओपन कास्ट खदान, बल्लारपुर क्षेत्र की ओवरबर्डन (ओबी) डंप भूमि पर वाणिज्यिक बांसारोपण परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है।

 

यह एमओयू, वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे, निदेशक (वित्त) श्री बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) श्री संदीप परांजपे की उपस्थिति में वेकोलि के निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री आनंदजी प्रसाद एवं महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल के प्रबंध निदेशक श्री कल्याण कुमार ने हस्ताक्षरित किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

 

इस अवसर पर डॉ. हेमंत शरद पांडे ने कहा कि वेकोलि केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत विकास एवं हरित भविष्य के निर्माण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक बांसारोपण जैसी पहलें खनन के बाद भूमि के उत्पादक उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर भी सृजित करेंगी।

 

इस एमओयू के अंतर्गत सस्ती ओपन कास्ट खदान की 19.75 हेक्टेयर पुनर्वासित खनन भूमि पर लगभग 21,942 बांस पौधों का रोपण किया जाएगा। परियोजना के प्रारंभिक पांच वर्षों में वेकोलि द्वारा लगभग 1.33 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। वहीं महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल द्वारा बांस की खेती, पौधरोपण विकास, सिंचाई, रखरखाव, कटाई, विपणन तथा उत्पाद की बिक्री की संपूर्ण जिम्मेदारी निभाई जाएगी।

 

यह परियोजना 15 वर्ष की अवधि के लिए लागू रहेगी। इसके अंतर्गत एक पारदर्शी राजस्व-साझेदारी मॉडल अपनाया गया है, जिसके अनुसार परियोजना से प्राप्त शुद्ध लाभ का 85 प्रतिशत हिस्सा वेकोलि को प्राप्त होगा, जबकि 15 प्रतिशत राशि महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल को सुविधा शुल्क के रूप में दी जाएगी। अनुमान है कि परियोजना सातवें वर्ष में वित्तीय संतुलन प्राप्त कर लेगी।

 

यह परियोजना आर्थिक लाभ के साथ-साथ महत्वपूर्ण पर्यावरणीय एवं सामाजिक लाभ भी प्रदान करेगी। पुनर्वासित खनन भूमि का पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, कार्बन अवशोषण में वृद्धि, ओबी डंप ढलानों का स्थिरीकरण, धूल नियंत्रण, हरित अवरोधों का विकास तथा स्थानीय समुदायों एवं परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के लिए रोजगार सृजन जैसे अनेक सकारात्मक परिणाम इस पहल से प्राप्त होंगे।

 

वेकोलि एवं महाराष्ट्र बांबू विकास मंडल के मध्य वाणिज्यिक बांसारोपण के लिए यह तीसरा एमओयू है। इससे पूर्व उमरेड क्षेत्र की मकरधोकरा-III ओपन कास्ट खदान की 30.635 हेक्टेयर भूमि तथा नागपुर क्षेत्र की अमलगमेटेड इंदर-कामठी ओपन कास्ट खदान की 43.045 हेक्टेयर भूमि पर इसी प्रकार की परियोजनाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं।

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