“सनातन को मिटाने वाले खुद ही मिट जायेंगे” — जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज
ऐतिहासिक कलश यात्रा के साथ भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का शुभारंभ, जय श्रीराम के जयघोष से राममय हुआ चिरमिरी शहर

चिरमिरी। के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम गोदरीपारा में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का शुभारंभ ऐतिहासिक कलश यात्रा, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। कथा के प्रथम दिवस कथा व्यासपीठ पर विराजमान पद्मविभूषित तुलसीपीठाधीश्वर ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, सत्संग और जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायी संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
शाम 4 बजे से प्रारंभ हुई कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयघोष से पूरा कथा स्थल भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालु कथा पंडाल में देर शाम तक संत वचनों का श्रवण करते रहे। कथा स्थल पर धार्मिक उल्लास और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
अपने उद्बोधन में जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म अनादि और अनंत है, इसे समाप्त करने का प्रयास करने वाले स्वयं इतिहास से मिट जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अपमान करने वाली शक्तियां कभी स्थायी नहीं रह सकतीं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन्होंने धर्म और संस्कृति के विरुद्ध कार्य किया, समय ने उन्हें स्वयं उत्तर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, आध्यात्मिकता और सनातन मूल्यों में निहित है। समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिये और नई पीढ़ी को भी धर्म, संस्कार और संस्कृति की शिक्षा देना समय की आवश्यकता है।
“दूसरों के लिये भी वही सोचें, जो अपने लिये अच्छा लगे”
कथा के दौरान जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने जीवन व्यवहार पर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को वही शब्द और व्यवहार अपनाना चाहिये, जिसे वह स्वयं अपने लिये पसंद करता हो। यदि किसी व्यक्ति को अपमानजनक शब्द सुनना अच्छा नहीं लगता तो उसे दूसरों के प्रति भी वैसी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिये। उन्होंने कहा कि वाणी की पवित्रता ही श्रेष्ठ समाज की सबसे बड़ी पहचान है।
महाराज श्री ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संयमित भाषा, सद्व्यवहार और आपसी सम्मान की सबसे अधिक आवश्यकता है। मधुर वाणी और सकारात्मक सोच से ही परिवार और समाज में प्रेम तथा सौहार्द बना रह सकता है।
सत्संग और संत सेवा का बताया महत्व
जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने सत्संग और संत सेवा की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि संतों की सेवा और सत्संग से मनुष्य के जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा श्रद्धा रखने वालों पर समय आने पर ईश्वर की कृपा अवश्य होती है। उन्होंने कहा कि सत्संग केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला माध्यम है।
उन्होंने पुराणों के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भगवान शिव और माता सती की कथा के माध्यम से सत्य, विश्वास और सत्संग के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन के लिये मन में उठने वाली सच्ची छटपटाहट ही वास्तविक भक्ति और सत्संग है।
श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा कथा स्थल
श्रीराम कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिये पहुंचे। आयोजन समिति द्वारा पेयजल, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। कथा स्थल पर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
आयोजन समिति ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी दिनों में कथा के दौरान रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन तथा सनातन संस्कृति के गूढ़ संदेशों का विस्तृत वर्णन किया जायेगा। कथा महोत्सव को लेकर पूरे चिरमिरी शहर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।






































