आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की ऐतिहासिक जीत

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हाईकोर्ट के आदेश से बहाल होगा मानदेय, 84 माह का एरियर 6% ब्याज सहित मिलेगा

यह एटक की नहीं, मध्यप्रदेश की सभी आंगनबाड़ी बहनों की जीत है” — विभा पांडेय

 

जमुना कोतमा मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत भरी खबर सामने आई है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं मिनी कार्यकर्ताओं को वर्ष 2019 से रोका गया मानदेय का हिस्सा पुनः बहाल करते हुए 84 माह का एरियर 6 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करना होगा। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश की आंगनबाड़ी बहनों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मध्यप्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की महासचिव कामरेड विभा पांडेय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक 14501/2019 दायर की गई थी। इस याचिका में वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में की गई कटौती को चुनौती दी गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने आंगनबाड़ी बहनों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि दिनांक 27 जून 2019 से पूर्व जो मानदेय का हिस्सा दिया जा रहा था, उसे पुनः बहाल किया जाए तथा उक्त अवधि से बकाया राशि एरियर के रूप में ब्याज सहित अदा की जाए।

उच्च न्यायालय के आदेशानुसार अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹1500 प्रति माह, सहायिकाओं को ₹750 प्रति माह तथा मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹1250 प्रति माह की दर से 27 जून 2019 से भुगतान की तिथि तक एरियर दिया जाएगा। इस आदेश के अनुसार 84 माह की अवधि का कुल एरियर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगभग ₹1,26,000, सहायिका को ₹63,000 तथा मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ₹1,05,000 मिलेगा। इसके अतिरिक्त इस पूरी राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अलग से दिया जाएगा।

माननीय उच्च न्यायालय ने अपने दिनांक 3 फरवरी 2026 के आदेश को समाहित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार को यह संपूर्ण भुगतान 120 दिनों के भीतर, अर्थात 3 जून 2026 तक करना होगा। न्यायालय के इस स्पष्ट निर्देश के बाद अब राज्य सरकार पर समयबद्ध भुगतान का कानूनी दायित्व आ गया है।

यह फैसला केवल मानदेय बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के लिए भी यह आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹1,25,000 और सहायिकाओं को ₹1,00,000 की एकमुश्त राशि दी जाती थी, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था को अपर्याप्त मानते हुए स्पष्ट किया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।

न्यायालय के आदेश के अनुसार अब सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को उनकी सेवा अवधि के अनुसार अंतिम वेतन के आधार पर 15 दिन के वेतन प्रति वर्ष की दर से ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा। इसका सीधा लाभ उन हजारों आंगनबाड़ी बहनों को मिलेगा, जो वर्षों से कम मानदेय में सेवा देने के बाद भी उचित सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित थीं।

एटक की प्रदेश महासचिव कामरेड विभा पांडेय ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एटक यूनियन की जीत नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी कार्यकर्ता बहन की जीत है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष वर्षों से चल रहा था और अब न्यायालय ने आंगनबाड़ी बहनों के सम्मान, अधिकार और आर्थिक न्याय के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला दिया है।

विभा पांडेय ने प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी बहनों से अपील की है कि जो बहनें सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, वे अब ग्रेच्युटी के लिए आवेदन करें। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सभी पात्र सेवानिवृत्त बहनों को ग्रेच्युटी एक्ट के तहत पूरा लाभ मिलेगा और अब किसी भी बहन को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पूरे मध्यप्रदेश में जिला स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। सभी जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक द्वारा जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर शासन से समयसीमा के भीतर भुगतान कराने की मांग की जाएगी।

इस ऐतिहासिक निर्णय ने न केवल आंगनबाड़ी बहनों को आर्थिक राहत दी है, बल्कि उनके वर्षों पुराने संघर्ष, श्रम और सम्मान को भी न्याय दिलाया है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए 3 जून 2026 तक सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी कार्यकर्ताओं को उनका बकाया एरियर और ग्रेच्युटी का लाभ समय पर उपलब्ध कराती है या नहीं।

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