एमसीबी। जिले में धान उत्पादन को बढ़ाने और मृदा की सेहत सुधारने के लिये कृषि विभाग ने खरीफ सीजन से पहले हरी खाद को बढ़ावा देने का विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग का फोकस रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर किसानों को टिकाऊ और किफायती खेती की ओर प्रोत्साहित करना है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घट रही है और लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो रहे हैं। ऐसे में हरी खाद एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आई है जो ना केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है बल्कि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि करती है।
जिले में रोपा पद्धति से धान की खेती अधिक होती है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे रोपाई से पहले खेतों में ढैंचा, सन जैसी दलहनी फसलों की बुवाई करें। इन फसलों को 35 से 45 दिन बाद जब इनकी ऊंचाई 2 से 3 फुट हो जाये तब मिट्टी में पलट दिया जाता है। इससे ये तेजी से सड़-गलकर प्राकृतिक खाद में बदल जाती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ढैंचा जैसी हरी खाद प्रति हेक्टेयर 30 से 40 किलोग्राम तक नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है साथ ही यह मिट्टी की निचली परतों से फॉस्फोरस और पोटाश को ऊपर लाकर मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है।
कृषि विभाग ने जिले में कुल 176 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद के विस्तार का लक्ष्य रखा है। इसमें मनेन्द्रगढ़ और भरतपुर विकासखंड के लिये 62-62 हेक्टेयर और खड़गवां के लिये 52 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
किसानों को प्रोत्साहित करने के लिये विभाग द्वारा हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराये जायेंगे।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर इस योजना का लाभ लें और मृदा स्वास्थ्य के साथ बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।
इस पहल को जिले में टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे आने वाले समय में किसानों को आर्थिक रूप से भी लाभ मिलने की उम्मीद है।


















































