आईसीएसएसआर प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: “Cultural Tourism 2.0” पर मंथन, विकसित भारत 2047 की दिशा तय

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अमरकंटक (मध्य प्रदेश)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), नई दिल्ली के प्रायोजन से पर्यटन एवं प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “Cultural Tourism 2.0: Connecting India’s Past, Present and Future for Viksit Bharat 2047” का सफल समापन हुआ। संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सांस्कृतिक पर्यटन के विविध आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

 

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. वाई. वेंकट राव तथा मुख्य वक्ता के रूप में काकतिया विश्वविद्यालय के प्रो. विजय बाबू उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एस.के. बराल, विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार सिंह एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. जयप्रकाश नारायण की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन कर अकादमिक विमर्श का शुभारंभ किया।

 

संगोष्ठी के प्रथम दिवस में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सांस्कृतिक पर्यटन की भूमिका, विरासत संरक्षण और समकालीन परिप्रेक्ष्य में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई। पहले दिन 40 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर विषय के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला।

 

इसके अतिरिक्त एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. एम.टी.वी. नागराजु ने की। पैनल में प्रो. आर. रविकांत, प्रो. शंकर राव, विश्वविद्यालय के प्रो. यूसुफ रहील झाई एवं प्रो. देवेंद्र सिंह शामिल रहे। विशेषज्ञों ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए।

 

संगोष्ठी का केंद्रीय विषय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गहराई से पड़ताल करते हुए उसे आधुनिक युग में प्रासंगिक बनाने और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान मजबूत करने पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि सांस्कृतिक पर्यटन को सशक्त बनाने के लिए सतत शोध, संस्थागत सहयोग और प्रभावी नीतिगत समर्थन अत्यंत आवश्यक है।

 

दो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने न केवल शैक्षणिक संवाद को समृद्ध किया, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण और संभावनाओं के द्वार भी खोले।

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