शाम ढल चुकी थी, पर अनूपपुर रेलवे स्टेशन कैंपस का चौराहा मानो अभी-अभी जागा हो। सफेद रोशनियों की परछाइयों में लाल कालीन से सजा मंच दमक रहा था। पीछे विशाल पोस्टर पर लिखा था—“दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल अनूपपुर, वेंकटनगर एवं कोतमा स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव का लोकार्पण।” मंच पर शहडोल की सांसद हिमाद्री सिंह और बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ रेल अधिकारी विराजमान थे। भाषणों में मोदी जी के विकास की गूंज थी, तालियों की गड़गड़ाहट थी और मोबाइल के कैमरों की चमक में उपलब्धियों की तस्वीरें कैद हो रही थीं। लगभग आठ घंटे विलंब से पहुँची रानी कमलापति–संतरागाछी एक्सप्रेस को जब हरी झंडी दिखाई गई तो भीड़ से राहत की सामूहिक आवाज निकली “चलो, रुकी तो सही।”
लेकिन जैसे ही मंच से अतिथि उतरे, असली आयोजन चौराहे पर शुरू हुआ। चाय की दुकान के पास ऑटो चालकों की पुकार आ जाओ आ जाओ “बस स्टैंड… अस्पताल… लाईन उसपार जाने वाले…! उधर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी चंदिया–चिरमिरी पैसेंजर ने सीटी दी और डिब्बों की खड़खड़ाहट मानो बहस की ताल बन गई। स्टेशन के बाहर कोई पुराना पेड़ अब नहीं था उसकी जगह प्लास्टिक की कुर्सियाँ थीं सफेद कवर ओढ़े हुए और उन पर बैठे थे जिले की राजनीति में तालियां बजाने वाले विकास की उम्मीद और राजनीति की चौपाल।
कक्का, जिनकी बातों में अनुभव का वजन था; घसीटा, जिसके सवालों में धार थी; चौरंगी लाल, जो हर बात को “प्रक्रिया” कहकर समझाते थे; और खबरी लाल, जिनका मोबाइल कैमरा हर क्षण ऑन रहता है और बुद्धि ऑफ और काजू बादाम जेब में।सब इक्कठा थे। घसीटा ने कुल्हड़ से चाय का घूंट लिया और कक्का की ओर देखकर कहा, “हरी झंडी समय पर दिख गई… पर गाड़ी समय पर नहीं आई ?” भीड़ में हल्की हँसी तैर गई। चौरंगी लाल ने संयमित स्वर में कहा, “विकास एक सतत प्रक्रिया है।” घसीटा ने तुरंत जवाब दिया, “इतनी सतत कि यात्री प्लेटफॉर्म पर ही वरिष्ठ नागरिक बन जाए?”आज चौपाल में
बहस का रुख सुबह की रेल सुविधा की ओर मुड़ा। घसीटा ने सवाल दागा “कटनी से अनूपपुर के लिए सुबह की ट्रेन कब चलेगी? विद्यार्थी, व्यापारी और दैनिक यात्री रोज पूछते हैं।” चौरंगी लाल ने कहा, “रेलवे मंत्री को पत्र लिखा गया है।” घसीटा मुस्कराया “कक्का ने गंभीर स्वर में कहा कि सुबह की ट्रेन केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का पहिया है।
फिर चर्चा नागपुर की ओर पहुँची। “नागपुर से आने वाली ट्रेन को अनूपपुर तक बढ़ाइए,” घसीटा बोला, “दक्षिण भारत से सीधा संपर्क होगा मरीज, छात्र, व्यापारी सब लाभान्वित होंगे।” कक्का ने कहा, “रेल संपर्क विकास का इंजन है, भाषण का हॉर्न नहीं।”
मुद्दा तीसरा था कोतमा का फ्लाईओवर/ फुटओवर ब्रिज का जो कोतमा–भालूमाड़ा मुख्य मार्ग पर रेलवे अंडर ग्राउंड ब्रिज में जाम लगता है, बरसात में तालाब बन जाता है एंबुलेंस अटक जाती है। घसीटा ने तीखा वाक्य उछाला “अंडर ब्रिज बंद तो शहर बंद।” चौरंगी लाल बोले कि फ्लाईओवर बनेगा तो कोतमा भालूमाड़ा मुख्य मार्ग सीधे नेशनल हाईवे से जुड़ेगा। कक्का ने कहा “यह मांग नहीं, जरूरत है विकास की साँस वहीं अटकी है।”
इसके बाद अनूपपुर विकास मंच के प्रमुख सीनियर एडवोकेट वासुदेव चटर्जी ने ज्ञापन सौंपा जो चौपाल में मांगों की पूरी सूची गूंजी—संतरा गाछी एक्सप्रेस समय पर चले पुरी–बलसाड़ एक्सप्रेस बोरीवली तक बढ़े चिरमिरी–अनूपपुर और रीवा लाइन की ट्रेनें नियमित हों; रायपुर–लखनऊ गरीब रथ में अतिरिक्त चेयरकार लगे; अनूपपुर–अंबिकापुर मेमो पुनः शुरू हो; प्लेटफॉर्म 5-6 का विकास हो रोड ओवरब्रिज और फुट ओवरब्रिज जल्दी बनें बंद एटीएम और पीआरएस केंद्र चालू हों; पेंड्रा रोड–अमरकंटक सर्वे के बाद त्वरित बजट मिले शहडोल–जयसिंगनगर लाइन को प्राथमिकता दी जाए। भीड़ से स्वर उठा—“सही बात!”
उधर मंच के किनारे खबरी लाल फोटो सेशन में व्यस्त थे। “सर, जरा माइक पकड़िए… मुस्कुराइए… हाँ, ऐसे!” टेबल पर रखे काजू-बादाम उनकी व्यस्तता के साक्षी थे। घसीटा ने धीरे से कहा, “खबर कम, काजू ज्यादा।” खबरी लाल बोले,ये “ऐतिहासिक दिन है।” घसीटा ने तुरंत चुटकी ली, “इतिहास बन गया… भूगोल कब सुधरेगा?” ठहाके गूंज उठे। जब खबरी लाल ने कहा, “जनता खुश है,” तो घसीटा ने जवाब दिया, “जनता खुश है कि ट्रेन रुकी; और खुश होगी जब समय पर रुके।”
मंच पर घोषणाएँ थीं—“सर्वे होगा… प्रस्ताव जाएगा… प्राथमिकता दी जाएगी…” और मैदान में सवाल—“सर्वे के बाद बजट कब? बजट के बाद निर्माण कब?” अंत में कक्का ने शांत स्वर में कहा, “घोषणा विकास का ट्रेलर है, निर्माण पूरी फिल्म। जनता टिकट खरीद चुकी है; अब शो समय पर शुरू होना चाहिए।”
रात गहराने लगी, चौराहा शांत हुआ, पर सवाल हवा में तैरते रहे। अनूपपुर की इस शाम ने साफ कर दिया कि मंच पर उपलब्धि की चमक थी, पर मैदान में अपेक्षाओं की आग। लोकार्पण ने उम्मीद जगाई है, पर चौपाल याद दिलाती है विकास की असली परीक्षा भाषण नहीं, समय पर चलती ट्रेन और खुला फ्लाईओवर है। हरी झंडी दिख चुकी है; फ्लाई ओवर ब्रिज/फुटब्रिज कब यही अनूपपुर की जनता का अगला प्रश्न है।








