24 ईवीएम का हिसाब गायब! पुराने तहसील भवन से मशीनें हटाते ही खुला मामला
भौतिक सत्यापन में 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट कम मिलीं, शिक्षकों ने शिकायत कर उठाए गंभीर सवाल
अनूपपुर। जिले में निर्वाचन से जुड़ी ईवीएम मशीनों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। पुराने तहसील भवन में रखी ईवीएम मशीनों को हटाने के दौरान किए गए भौतिक सत्यापन में कुल 24 मशीनें कम मिली हैं। इनमें 8 बैलेट यूनिट (BU) और 16 कंट्रोल यूनिट (CU) शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षकों द्वारा इसकी शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद निर्वाचन सामग्री के रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मशीनें हटाने के दौरान सामने आया अंतर
जानकारी के अनुसार पुराने तहसील भवन में रखी निर्वाचन सामग्री को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के दौरान ईवीएम मशीनों का भौतिक सत्यापन किया गया। रिकॉर्ड में दर्ज मशीनों की संख्या का मौके पर उपलब्ध मशीनों से मिलान करने पर 24 ईवीएम इकाइयां कम पाई गईं।
भौतिक सत्यापन में 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट उपलब्ध नहीं मिलीं। इतनी बड़ी संख्या में मशीनों का रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता में अंतर सामने आने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
शिक्षकों ने की शिकायत
बताया जा रहा है कि मामले को लेकर शिक्षकों की ओर से संबंधित स्तर पर शिकायत की गई है। शिकायत में ईवीएम मशीनों के भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आई कमी और उनके रिकॉर्ड को लेकर जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
शिकायत के बाद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि रिकॉर्ड में दर्ज ये मशीनें आखिर कहां हैं और इनका अंतिम सत्यापन कब किया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मशीनों को पुराने तहसील भवन में किस प्रक्रिया के तहत रखा गया था और स्थानांतरण से पहले इनके रिकॉर्ड का मिलान किस स्तर पर किया गया।
24 मशीनों का रिकॉर्ड कहां है?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट आखिर कहां गईं? क्या इन मशीनों को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया था? यदि ऐसा हुआ है तो उसका रिकॉर्ड निर्वाचन विभाग के दस्तावेजों में दर्ज है या नहीं? अथवा रिकॉर्ड संधारण में कोई चूक हुई है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
रिकॉर्ड, सीरियल नंबर और स्टॉक रजिस्टर की जांच जरूरी
ईवीएम मशीनें निर्वाचन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण सामग्री हैं। प्रत्येक मशीन की पहचान संख्या और उसके भंडारण एवं स्थानांतरण का रिकॉर्ड रखा जाता है। ऐसे में 24 मशीनों के कम मिलने के बाद संबंधित स्टॉक रजिस्टर, ईवीएम की सूची, मशीनों के सीरियल नंबर, आवंटन एवं स्थानांतरण संबंधी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि मशीनें आखिरी बार किस स्थान पर दर्ज थीं और उनका भौतिक सत्यापन कब किया गया था।
चोरी या रिकॉर्ड में गड़बड़ी, जांच से होगा खुलासा
फिलहाल भौतिक सत्यापन में 24 ईवीएम इकाइयों के कम मिलने की बात सामने आई है। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इसे सीधे चोरी का मामला कहना जल्दबाजी होगी। मशीनें किसी अन्य अधिकृत स्थान पर स्थानांतरित होने, रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से भी अंतर सामने आ सकता है।
लेकिन यदि जांच में मशीनों के गायब होने की पुष्टि होती है, तो मामला गंभीर हो सकता है और संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
निर्वाचन व्यवस्था पर उठे सवाल
ईवीएम जैसी संवेदनशील निर्वाचन सामग्री के रिकॉर्ड में इतनी बड़ी संख्या में अंतर सामने आने के बाद निर्वाचन व्यवस्था में मशीनों के रखरखाव और रिकॉर्ड संधारण को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 24 ईवीएम इकाइयों का वास्तविक स्थान क्या है और रिकॉर्ड में यह अंतर किस वजह से पैदा हुआ।
शिक्षकों की शिकायत के बाद मामला चर्चा में आने से अब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार है।







































































