CM हेल्पलाइन का उड़ा मखौल! ग्राम पंचायत पायरी नंबर 1 के कथित गबन में PCO यूजीन टोप्पो की ‘फर्जी रिपोर्ट’, सवालों के कटघरे में जनपद CEO रवि ग्वाल: क्या उच्च स्तर से मिल रहा सचिव को अभयदान?

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CM हेल्पलाइन का उड़ा मखौल! ग्राम पंचायत पायरी नंबर 1 के कथित गबन में PCO यूजीन टोप्पो की ‘फर्जी रिपोर्ट’, सवालों के कटघरे में जनपद CEO रवि ग्वाल: क्या उच्च स्तर से मिल रहा सचिव को अभयदान?

जमुना कोतमा क्या मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री सीएम हेल्पलाइन’ (181) अब केवल फाइलों का पेट भरने और भ्रष्ट तंत्र को ‘क्लीन चिट’ देने वाली मशीन बनकर रह गई है? जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक 1 में सचिव के कथित मनमाने भ्रष्टाचार और उस पर लीपापोती करने वाले अधिकारियों के गठजोड़ ने इसी ओर इशारा किया है। सीएम हेल्पलाइन शिकायत (क्रमांक: 37380134) पर जांच अधिकारी PCO यूजीन टोप्पो और जनपद CEO श्री रवि ग्वाल की कार्यप्रणाली ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।

तानाशाही, नियमों का कत्ल और कथित गबन का खुला खेल

शिकायतकर्ता के गंभीर आरोपों के अनुसार, पंचायत सचिव श्री नीक राम केवट ने पूरी त्रि-स्तरीय व्यवस्था को अपनी बपौती बना लिया है। मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (स्थायी समिति के सदस्यों की पदावधि तथा कार्य संचालन की प्रक्रिया) नियम, 1994 के तहत अनिवार्य स्थायी समितियों की बैठकों का कोई अता-पता नहीं है। पंचों के वैधानिक अधिकारों को कुचलते हुए, सचिव पर कथित तौर पर अपनी मर्जी से ‘पंचायत दर्पण पोर्टल’ पर बिल लगाकर, बिना भौतिक सत्यापन के ही शासकीय राशि निकालने के गंभीर आरोप हैं। मामले को दबाने के लिए पुरानी तारीखों (Back-dates) में फर्जी प्रस्ताव और जाली हस्ताक्षर रचे जाने की प्रबल आशंका भी जताई गई है।
जांच के नाम पर PCO यूजीन टोप्पो का ‘सफेद झूठ’ और कागजी लीपापोती
इस कथित महाघोटाले की शिकायत (क्र. 37380134) जब सीएम हेल्पलाइन में पहुंची, तो जांच अधिकारी PCO यूजीन टोप्पो ने सच्चाई सामने लाने के बजाय, टेबल पर बैठकर ‘सफेद झूठ’ की पटकथा लिख दी। पोर्टल पर पूरी बेशर्मी से जांच अधिकारी द्वारा यह भ्रामक प्रतिवेदन दर्ज कर दिया गया:

पीसीओ यूजीन टोप्पो से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार शिकायत में जिस नाम से शिकायत की गई है उनके द्वारा कोई भी शिकायत नही की गई है। शिकायतकर्ता के नाम से किसी अन्य ब्यक्ति द्वारा गलत मोबाइल नम्बर का प्रयोग करते हुए उक्त शिकायत सीपी ग्राम में के माध्यम से की गई है शिकायत में दर्ज मोबाइल नम्बर बन्द है कृपया शिकायत बन्द करने का कष्ट करें।”

जबकि हकीकत में शिकायतकर्ता का नंबर पूरी तरह से चालू है। यह स्पष्ट करता है कि PCO यूजीन टोप्पो ने न तो मौके पर जाने की जहमत उठाई और न ही सच्चाई जानने की।

सबसे बड़ा सवाल: क्या जनपद CEO रवि ग्वाल बन गए हैं ‘मूकदर्शक’?
इस पूरे कथित फर्जीवाड़े में जनपद पंचायत के CEO श्री रवि ग्वाल की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। जनता के टैक्स से वेतन पाने वाले एक जिम्मेदार अधिकारी ने PCO यूजीन टोप्पो की इस ‘फर्जी रिपोर्ट’ को बिना क्रॉस-चेक किए आंख मूंदकर आगे कैसे बढ़ा दिया?
क्या CEO महोदय के पास इतना भी समय नहीं था कि वे उस कथित ‘बंद नंबर’ पर एक कॉल लगाकर सच्चाई परख लेते?
क्या बिना उच्चाधिकारियों की मौन स्वीकृति या संरक्षण के कोई PCO इतनी बड़ी भ्रामक रिपोर्ट शासन के पोर्टल पर डालने की हिम्मत कर सकता है?
स्थानीय लोगों में तीखी चर्चा है कि CEO रवि ग्वाल की यह ‘चुप्पी’ और बिना सत्यापन रिपोर्ट को स्वीकार करना, कहीं न कहीं आरोपी सचिव को बचाने की कथित साजिश का ही हिस्सा प्रतीत होता है।

क्या बंद कर देनी चाहिए CM हेल्पलाइन?

जनता का सीधा सवाल है कि यदि वातानुकूलित कमरों में बैठकर, ‘बंद नंबर’ का बहाना बनाकर शिकायतों को रफा-दफा ही करना है, तो सरकार को इस ‘सीएम हेल्पलाइन’ का तमाशा तत्काल बंद कर देना चाहिए।
अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि जिला प्रशासन और कलेक्टर महोदय तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 69 तथा ‘मध्य प्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999’ के तहत पंचायत सचिव को निलंबित कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करें। साथ ही, शासन को गुमराह करने वाली भ्रामक रिपोर्ट देने वाले PCO यूजीन टोप्पो और इस घोर पर्यवेक्षणीय लापरवाही के लिए जनपद CEO रवि ग्वाल की कार्यप्रणाली की भी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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