भालू के जबड़ों के बीच 14 जिंदगियां, खांड़ा में पहाड़ के नीचे झोपड़ियों में रह रहे परिवार

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भालू के जबड़ों के बीच 14 जिंदगियां, खांड़ा में पहाड़ के नीचे झोपड़ियों में रह रहे परिवार

वन विभाग के भालू विचरण क्षेत्र में बाहरी लोगों का डेरा, छोटे बच्चों समेत परिवारों की मौजूदगी से सुरक्षा पर सवाल; सूचना के बाद कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

अनूपपुर। जिले के खांड़ा क्षेत्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष की आशंका के बीच एक गंभीर मामला सामने आया है। भालू विचरण क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इलाके में पहाड़ के नीचे झोपड़ियां बनाकर करीब 14 लोगों के रहने की जानकारी सामने आई है। इनमें परिवारों के साथ छोटे बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में लोगों के इस तरह रहने से उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्राम पंचायत खांड़ा के दस्तावेजों के अनुसार, शिवपुरी जिले के गोदरी क्षेत्र से आए कुछ लोग यहां झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। बताया गया है कि ये लोग परिवार सहित मौके पर रह रहे हैं। ग्राम पंचायत की ओर से मौके पर पंचनामा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसमें मौके पर मौजूद लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।

ठेकेदार के माध्यम से काम के लिए लाए जाने की बात

पंचनामा के दौरान पूछताछ में मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि उन्हें अनूपपुर के ठेकेदार लकी वर्मा द्वारा काम कराने के लिए यहां लाया गया है। यदि यह जानकारी सही है तो सवाल उठता है कि काम के लिए लाए गए इन श्रमिकों और उनके परिवारों के रहने की व्यवस्था कहां और किसकी जिम्मेदारी पर की गई।

वहीं, जिस स्थान पर ये लोग रह रहे हैं, उसके वनभूमि से संबंधित होने की भी चर्चा सामने आ रही है। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति राजस्व एवं वन विभाग के अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

भालू विचरण क्षेत्र में झोपड़ियां कैसे बनीं?

खांड़ा क्षेत्र में पूर्व में भालू की मौजूदगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में वन क्षेत्र से सटे संवेदनशील स्थान पर परिवारों और छोटे बच्चों के साथ लोगों का झोपड़ियों में रहना वन्यजीव सुरक्षा के साथ-साथ मानव सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर विषय है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह क्षेत्र वन विभाग की निगरानी में है और भालू विचरण क्षेत्र के रूप में चिन्हित है, तो यहां झोपड़ियां बनने और लोगों के रहने की स्थिति कैसे बनी? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो समय रहते उन्हें सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया?

रेंजर को सूचना देने का दावा

पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व अनूपपुर विधायक प्रत्याशी रमेश सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं संबंधित वन विभाग के रेंजर को फोन के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी थी। उनका कहना है कि उन्होंने लोगों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई किए जाने की बात कही थी।

रमेश सिंह के अनुसार, सूचना दिए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भालू विचरण क्षेत्र में परिवारों और छोटे बच्चों का इस तरह रहना किसी संभावित हादसे को न्योता देने जैसा है। यदि विभाग को जानकारी मिलने के बाद भी समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते और कोई अप्रिय घटना घटती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका

खांड़ा क्षेत्र में भालू की आवाजाही को देखते हुए यहां रहने वाले परिवारों के सामने लगातार खतरा बना रहने की आशंका है। खासकर सुबह और शाम के समय जंगल से लगे इलाकों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में खुले और असुरक्षित स्थान पर बनी झोपड़ियों में परिवारों का रहना चिंता का विषय है।

वन विभाग की जिम्मेदारी केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और वहां काम करने वाले श्रमिकों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक करना तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है।

जानकारी के बाद क्या हुई कार्रवाई?

मामले में अब कई सवाल वन विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। यदि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को पहले ही जानकारी दी गई थी तो क्या विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया? क्या वहां रहने वाले परिवारों को भालू के संभावित हमले के खतरे से अवगत कराया गया? क्या उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए गए? यदि भूमि वनभूमि है तो वहां झोपड़ियां किसकी अनुमति से बनीं?

इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और मौके के निरीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

हादसे से पहले सुरक्षा जरूरी

मामला केवल अवैध कब्जे अथवा झोपड़ियों के निर्माण तक सीमित नहीं है। यहां सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न मानव जीवन की सुरक्षा का है। यदि इन लोगों को ठेकेदार द्वारा काम के लिए लाया गया है तो उनके लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

वहीं यदि भूमि वन क्षेत्र की है और वहां बिना अनुमति झोपड़ियां बनाई गई हैं तो वन विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही परिवारों, विशेषकर बच्चों को संभावित वन्यजीव हमले से बचाने के लिए तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाने की आवश्यकता है।

रेंजर ने कहा—सुरक्षित स्थान पर रहने के निर्देश दिए

मामले में वन विभाग के रेंजर स्वर्ण गौरव सिंह ने बताया कि जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को वहां से हटकर गांव में सुरक्षित स्थान पर मकान लेकर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

अब देखना होगा कि निर्देश के बाद संबंधित परिवार वास्तव में सुरक्षित स्थान पर जाते हैं या नहीं और वन विभाग मौके पर स्थिति की निगरानी किस तरह करता है। फिलहाल ग्राम पंचायत के पंचनामा, स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी और वन विभाग को दी गई सूचना के बाद यह मामला मानव सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जांच का विषय बन गया है।

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