अमरकंटक रेल कॉरिडोर को मिलेगी नई गति,विधायक मरकाम ने रेल मंत्री से मांगी FLS सर्वे की शीघ्र स्वीकृति

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अमरकंटक रेल कॉरिडोर को मिलेगी नई गति,विधायक मरकाम ने रेल मंत्री से मांगी FLS सर्वे की शीघ्र स्वीकृति

पेंड्रारोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला रेल परियोजना को लेकर बढ़ी उम्मीदें ,

आदिवासी अंचल और पर्यटन क्षेत्र को मिल सकता है नया विकास मार्ग

संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक सहित मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की वर्षों पुरानी मांग को एक बार फिर नई गति मिली है । डिंडोरी विधायक एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर प्रस्तावित पेंड्रारोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–घंसौर–लखनादौन–गोटेगांव/श्रीधाम रेल कॉरिडोर के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) की शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है ।

विधायक मरकाम ने अपने पत्र में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नर्मदा-विंध्य रेल कॉरिडोर बताते हुए कहा है कि यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है । रेल संपर्क स्थापित होने से क्षेत्र में शिक्षा , स्वास्थ्य , पर्यटन , व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है ।

अमरकंटक देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में शामिल है , जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक मां नर्मदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं । वर्तमान में यहां तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है । ऐसे में प्रस्तावित रेल लाइन को क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जा रहा है ।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे , बिलासपुर द्वारा इस प्रस्ताव को उपयोगी मानते हुए आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभाग को अग्रेषित किया जा चुका है । इसे परियोजना के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है ।

विधायक मरकाम ने रेल मंत्री से अनुरोध किया है कि फाइनल लोकेशन सर्वे को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं , जिससे परियोजना की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित हो सके । इस पहल की जानकारी सामने आने के बाद अमरकंटक , डिंडोरी और आसपास के क्षेत्रों में रेल संपर्क को लेकर नई उम्मीदें जागृत हुई हैं । स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में धार्मिक पर्यटन , क्षेत्रीय विकास और आदिवासी अंचल की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है ।

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