झीरम का फैसला आधा अधूरा न्याय, पूरी सच्चाई सामने आना बाकी :- कांग्रेस

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झीरम का फैसला आधा अधूरा न्याय, पूरी सच्चाई सामने आना बाकी :- कांग्रेस

कांग्रेस ने एनआईए कोर्ट के फैसले का किया सम्मान, घटना के पीछे की साजिश का पर्दाफाश करने की मांग

मनेन्द्रगढ़। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर के अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने प्रेसवार्ता आयोजित की। कांग्रेस नेताओं ने न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि झीरम कांड की पूरी सच्चाई और घटना के पीछे की कथित साजिश का पर्दाफाश अभी बाकी है

जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि 23 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 लोगों की हत्या हुई थी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे भयावह राजनीतिक घटनाओं में से एक बताते हुए कहा कि इतने बड़े नरसंहार की जांच केवल घटना के प्रत्यक्ष आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिये बल्कि इसके पीछे के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अनुसार एनआईए की जांच में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अब भी स्पष्ट नहीं हुए हैं। उन्होंने घटना के कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच, शुरुआती जांच में सामने आये कुछ नामों को बाद में एफआईआर और चार्जशीट से हटाये जाने तथा प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों से हुई पूछताछ को लेकर सवाल उठाये। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल ने कहा कि झीरम के शहीदों के परिवारों को केवल दोषियों की पहचान और सजा ही नहीं बल्कि घटना के पीछे की पूरी सच्चाई जानने का भी अधिकार है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े नरसंहार की जांच किसी एक पहलू तक सीमित नहीं रहनी चाहिये और घटना से जुड़ी हर कड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने कहा कि झीरम मामले में कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब प्रदेश की जनता आज भी चाहती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में कुछ बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आने और बाद में उनके नाम हटाये जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि झीरम मामले में वांछित बताये गये कुछ नक्सलियों के बाद में आत्मसमर्पण करने के बावजूद उनसे घटना की योजना और इसमें शामिल लोगों के संबंध में कितनी पूछताछ हुई यह भी सामने आना चाहिये

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेन्द्रगढ़ (ग्रामीण) के अध्यक्ष रामनरेश पटेल ने कहा कि झीरम हमले के प्रत्यक्षदर्शियों, घायलों और जीवित बचे लोगों के बयान जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उपलब्ध प्रत्येक साक्ष्य और गवाही की गंभीरता से जांच की जानी चाहिये

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खड़गवां के अध्यक्ष युधिष्ठिर कमरों ने कहा कि झीरम हमले से जुड़े कई नक्सलियों ने बाद में आत्मसमर्पण किया। उनके अनुसार ऐसे लोगों से घटना की योजना, हमले में शामिल लोगों और रणनीति को लेकर विस्तृत पूछताछ की जानी चाहिये थी। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की वास्तविक साजिश तक पहुंचने का प्रयास जरूरी है

जिला महामंत्री पूनम सिंह ने कहा कि झीरम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। शहीदों के परिवार वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलू सामने आयें। जिला महामंत्री रफीक मेमन ने झीरम मामले की जांच को लेकर तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी गठित कर जांच आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया था लेकिन बाद में यह जांच आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि एसआईटी को स्वतंत्र रूप से जांच का पूरा अवसर मिलता तो संभव है कि मामले से जुड़े और तथ्य सामने आते

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम का सच किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता और शहीदों के परिवारों के न्याय का सवाल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है लेकिन झीरम कांड की पूरी सच्चाई सामने आने तक इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवारों को न्याय और प्रदेश की जनता को झीरम कांड का पूरा सच मिलना ही कांग्रेस की प्राथमिकता है

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