एक्सप्रेस मेल की तरह भागते स्मार्ट मीटर निजी क्षेत्र की भागीदारी ने उपभोक्ताओं की जब पर डाका डाला

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लोकेशन धार

ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी

जब से धार शहर में स्मार्ट मीटर लगने की शुरुआत हुई थी तभी से उपभोक्ताओं ने इसका विरोध करना प्रारंभ कर दिया था कई उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत भी करी अपने मीटरो की जांच भी कार्रवाई पर नतीजा सिफर ही रहा क्योंकि जांच और परिणाम दोनों ही विद्युत वितरण कंपनी के हाथ में होते हैं कोई भी शासकीय विभाग इतनी आसानी से अपनी गलती को स्वीकार नहीं करता जांच में यह मीटर सही पाए जाते हैं उपभोक्ता का दावा यही खारिज हो जाता है पर एक तो जागरूकता की कमी दूसरे स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका जिन ठेकेदारों को दिया गया है वह उपभोक्ताओं से पूछे बिना ही फटाफट पुराना मीटर निकाल कर नए मीटर लगा दिए कई उपभोक्ता तो ऐसे हैं शहर में की जिनको मालूम ही नहीं है कि उनके पुराने मीटर को निकाल कर नया मीटर लगा दिया गया है पहले मीटर की जांच नापतोल विभाग के हाथ में होती थी किंतु नई नियमावली के अंतर्गत नापतोल विभाग की भूमिका भी को भी खत्म कर दिया गया है अब नापतोल विभाग का किसी भी प्रकार से मीटर की जांच में हस्तक्षेप नहीं रह गया निजी क्षेत्र की भागीदारी ने सारे नियम प्रशासन से अपने हित में पहले ही करवा रखे हैं यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर नहीं भी लगवाता है तो समस्या यह है कि पुराने मीटर की रीडिंग कौन करेगा और यदि 6 महीने में मीटर की रीडिंग होती है तो उपभोक्ता पर अत्यधिक आर्थिक बोझ बढ़ सकता है एक तो विद्युत वितरण कंपनी के पास पहले से ही कर्मचारियों की कमी है लगभग पुराने कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं आउटसोर्स कर्मचारी के साथ गठबंधन कर विभाग जैसे तैसे अपने कार्यकलापों को चल रहा है निजी कंपनियां किसी भी कीमत पर अपने हितों पर समझौता नहीं कर रही है जिसमें आम आदमी की फजीहत हो रही है

 

1 बाईटआवास सिंह वासकेल DEE मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी धार

 

बाईट 2 सतीश वर्मा प्रदेश सचिव उपभोक्ता उत्थान संगठन

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