संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक जो मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थ स्थलो में से एक है । यहां अब ग्रीष्म ऋतु ने अपनी दस्तक स्पष्ट रूप से दे दी है । दिन के समय तेज धूप और चुभन भरी गर्मी लोगों को परेशान करने लगी है वहीं शाम ढलते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाता है और ठंडी हवाओं के साथ वातावरण सुहावना एवं सुकूनदायक हो उठता है । यही विशेषता अमरकंटक को अन्य स्थानों से अलग बनाती है ।
गुरुवार 16 अप्रैल 2026 को अमरकंटक का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस अनुमानित पहुंच गया । वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 81 रहा जो अपेक्षाकृत स्वच्छ वातावरण का संकेत देता है जबकि आर्द्रता का स्तर 16 प्रतिशत रिकॉर्ड गया ।
प्रातः लगभग 11 बजे से शाम 5 बजे तक गर्मी का प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है । इस दौरान धूप की तीव्रता और तपिश लोगों को चुभन का एहसास करा रही है । वहीं शाम 6 बजे के बाद मौसम में अचानक शीतलता घुल जाती है और रात्रि का वातावरण अत्यंत खुशनुमा तथा ठंडक भरा हो जाता है ।
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि बीते 15 से 20 वर्षों में अमरकंटक के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है । उनका मानना है कि साल वृक्षों की कटाई , बढ़ती जनसंख्या और बाहरी हस्तक्षेप के कारण पर्यावरण संतुलन प्रभावित हुआ है । पहले 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान पहुंचते ही वर्षा हो जाया करती थी जिससे गर्मी अधिक नहीं बढ़ पाती थी ।
वरिष्ठ नागरिकों के अनुसार पहले मई-जून जैसे गर्म महीनों में भी अमरकंटक का मौसम इतना शीतल रहता था कि कूलर या वातानुकूलित यंत्रों की आवश्यकता नहीं पड़ती थी । साधारण पंखे से ही काम चल जाता था और कई बार रात्रि में हल्की ठंडक के कारण कंबल तक ओढ़ना पड़ता था ।
अब धीरे-धीरे अमरकंटक ग्रीष्म ऋतु की ओर अग्रसर है । आने वाले वैशाख , ज्येष्ठ एवं प्रारंभिक आषाढ़ माह में तापमान किस स्तर तक पहुंचेगा यह आने वाला समय ही तय करेगा ।



























