अनूपपुर-
श्री करौली शंकर महादेव पूर्वज मुक्ति धाम कानपुर में में विगत दिनों आयोजित त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ, इस पावन अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा प्राप्त की तथा लाखों पूर्व दीक्षित साधकों ने भी उपस्थित होकर साधना, ध्यान और तंत्र-क्रिया योग के उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में भाग लिया।
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को
श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर दास जी महाराज के सान्निध्य में दीक्षा प्रदान की गयी। दीक्षा प्राप्त करने के पश्चात साधक गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ध्यान-साधना के मार्ग पर अग्रसर होते हैं।
इस अवसर पर विशेष रूप से तंत्र-क्रिया योग पात्रता चयन प्रक्रिया का आयोजन किया गया, जिसमें साधकों ने अपने वर्तमान साधना स्तर से उच्च स्तर की परीक्षाएँ दीं। सफल साधकों को अगले स्तर की साधना के लिए पात्र घोषित किया गया,जबकि अन्य साधकों को पुनः अभ्यास कर अगली परीक्षा हेतु प्रेरित किया गया।
ध्यान-साधना का प्रमुख केंद्र
यह उल्लेखनीय है कि श्री करौली शंकर महादेव पूर्वज मुक्ति धाम कानपुर विश्व स्तर पर ध्यान-साधना और तंत्र-क्रिया योग का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ लाखों साधक गृहस्थ जीवन के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं। यह धाम भगवान शिव और माँ कामाख्या की उपासना तथा तंत्र-साधना के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
अखाड़ा परिषद द्वारा महामंडलेश्वर पद से अलंकृत
हाल ही में हरिद्वार में श्री पंचायती अखाडा नया उदासीन ( निर्वाण ) द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में महंत भगत राम जी महाराज एवं श्री पंचायत अखाड़ा नया उदासीन के पदाधिकारियों द्वारा पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी को अखाड़े का महामंडलेश्वर घोषित किया गया।
इस अवसर पर श्री रविन्द्र पूरी जी महाराज ( निर्वाणी अखाड़ा ), जो अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं ने कहा कि पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी एक दिव्य संत हैं,जिनका मार्गदर्शन समाज के आध्यात्मिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
ज्ञात हो कि पूर्व में भी विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी दर्ज की गयी है, जहाँ गुरु-शिष्य परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है।
गुरु-दीक्षा और साधना का संदेश
महोत्सव के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा, आत्मशुद्धि, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के महत्व पर विशेष बल दिया गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि गुरु-दीक्षा केवल आध्यात्मिक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का मार्ग भी है।
आयोजन के दौरान वातावरण भक्ति, ध्यान और मंत्रोच्चार से गूंजता रहा, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं ने गहन आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया।
समापन
त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का समापन सामूहिक प्रार्थना और आशीर्वचन के साथ हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है।
उक्ताशय की जानकारी तंत्र दीक्षित भक्त हनी चौरसिया एवं राजेश सिंह ने दी।

















