तीन हाथी करनपठार, एक खांड़ा के जंगल में सक्रिय; फसलों को नुकसान, सूचना तंत्र पर सवाल, मुआवजा न मिलने से आक्रोश

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कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल

 

अनूपपुर। जिले में हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीण अंचलों में दहशत का माहौल बना दिया है। छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र से आए चार हाथियों में तीन का दल करनपठार के जंगल में डेरा डाले हुए है, जबकि एक अकेला हाथी खांड़ा, पोंड़ी और आसपास के जंगलों में विचरण कर रहा है। तीनों हाथी दिन में जंगल में विश्राम करते हैं और देर शाम व रात में भोजन की तलाश में गांवों की ओर रुख कर फसलों व घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, यह हाथियों का दल पिछले 100 दिनों से अधिक समय से जिले के विभिन्न क्षेत्रों—जैतहरी, अनूपपुर, बुढार, अहिरगवां और डिंडोरी—में विचरण करता रहा है। हाल ही में यह दल करनपठार बीट के अतरिया, कुर्सेरा और बेनीबारी के जंगलों में ठहरा हुआ है। वहीं, एक अकेला हाथी बीते कुछ दिनों से खांड़ा, भोलगढ़, पोंड़ी और मानपुर क्षेत्र में सक्रिय है, जो रात में गांवों में घुसकर खेतों में लगी फसलें खा रहा है तथा मकानों और सिंचाई संसाधनों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों की सूचना समय पर नहीं दी जाती। मुनादी और अन्य चेतावनी उपायों के अभाव में लोग अनजाने में खतरे की चपेट में आ सकते हैं। कई बार सूचना देने के बाद भी विभागीय अमला देर से पहुंचता है और केवल औपचारिकता निभाते हुए नजर आता है।

 

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बरबसपुर गांव में 12 फरवरी की रात एक 70 वर्षीय वृद्ध की हाथी के हमले में मृत्यु हो गई थी, लेकिन दो माह बाद भी परिजनों को सहायता राशि नहीं मिल सकी है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि वे खुद ही मशाल, पटाखों और अन्य साधनों से हाथियों को खदेड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन, वन विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि हाथियों की निगरानी के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जाए, समय पर सूचना व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि क्षेत्र में जनहानि और नुकसान को रोका जा सके।

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