सीएम हेल्पलाइन में “कागजी” जांच का महाघोटाला: एसी कमरों में बैठकर पंचायत समन्वयक अधिकारी यूजीन टोप्पो ने बनाई फर्जी रिपोर्ट, बिना ग्रामीण से बात किए ही बता दिया ‘अपात्र’

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रिपोर्ट – मित्तल महरा

अनूपपुर। मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली ‘सीएम हेल्पलाइन’ योजना अनूपपुर जिले में बेलगाम और लापरवाह अधिकारियों के हाथों का खिलौना बनकर रह गई है। जमीनी हकीकत जाने बिना, एसी कमरों में बैठकर हवा-हवाई जांच रिपोर्ट बनाने का एक बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला जनपद पंचायत अनूपपुर से सामने आया है। यहाँ पंचायत समन्वयक अधिकारी श्री यूजीन टोप्पो ने अपनी संवेदनहीनता और कामचोरी की सारी हदें पार करते हुए, एक गरीब की प्रधानमंत्री आवास की शिकायत को रद्दी की टोकरी में डालने के लिए पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत रिपोर्ट पोर्टल पर फीड कर दी।

बिना मौके पर गए, बिना बात किए कैसे हो गया ‘स्थल निरीक्षण’?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पंचायत समन्वयक अधिकारी यूजीन टोप्पो की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। एक बेबस ग्रामीण ने जब पीएम आवास योजना से वंचित किए जाने पर न्याय की आस में सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाया, तो जांच अधिकारी यूजीन टोप्पो ने शिकायतकर्ता से एक बार भी संपर्क करना मुनासिब नहीं समझा।

आश्चर्य की बात यह है कि बिना शिकायतकर्ता को फोन किए, बिना उससे मिले और बिना उसके घर का दौरा किए, अधिकारी महोदय ने पोर्टल पर “स्थल निरीक्षण” (Site Inspection) की झूठी कहानी गढ़ दी। जब अधिकारी कभी मौके पर गया ही नहीं, तो उसने यह कैसे देख लिया कि “आवेदक पक्के मकान में निवासरत है”? यह स्पष्ट रूप से पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और शासन को गुमराह करने वाला सफेद झूठ है।

पोर्टल पर दर्ज किया गया फर्जीवाड़े का पुलिंदा

अपनी नाकामी और कामचोरी को छिपाने के लिए श्री यूजीन टोप्पो ने पोर्टल पर जो प्रतिवेदन दर्ज किया है, वह झूठ का पुलिंदा है। रिपोर्ट में मनमाने तरीके से लिख दिया गया कि एसईसीसी डाटा और आवास प्लस 2018 में नाम नहीं था। इसके बाद आवास प्लस 2024 की डिस्प्यूटेड लिस्ट (आईडी 188015465) का हवाला देकर चेकर द्वारा अपात्र किए जाने की बात लिख दी गई।

अंत में अपनी झूठी कहानी को सही ठहराने के लिए ‘पक्के मकान’ का फर्जी आधार बनाकर शिकायत को ‘मांग क्लोजर’ (Demand Closure) के तहत बंद करने की बेशर्म अनुशंसा कर दी गई। यह सिर्फ एक शिकायत को बंद करने का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे दफ्तरों में बैठे ये अधिकारी कागजों में हेराफेरी करके वास्तविक हितग्राहियों का हक मार रहे हैं।

जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है खेल

श्री यूजीन टोप्पो जैसे अधिकारियों की इस तानाशाही और फर्जी कार्यप्रणाली से सीएम हेल्पलाइन की मूल भावना ही दम तोड़ रही है। क्या अनूपपुर जिले में शिकायतों का निराकरण अब ऐसे ही फर्जी रिपोर्ट बनाकर किया जाएगा? क्या जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का इन बेलगाम हो चुके मैदानी अमले पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है?

कड़ी कार्रवाई और एफआईआर की उठ रही मांग

इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आम जनता की मांग है कि जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ इस मामले को तत्काल संज्ञान में लें। बिना मौके पर गए और बिना शिकायतकर्ता से बात किए फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले पंचायत समन्वयक अधिकारी श्री यूजीन टोप्पो के खिलाफ न केवल सख्त विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, बल्कि शासन को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज होनी चाहिए। यदि ऐसे अधिकारियों पर तत्काल लगाम नहीं लगाई गई, तो गरीबों का योजनाओं पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

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