कंपनी के 1.97 करोड़ रुपये गबन मामले में अकाउंटेंट को आजीवन सश्रम कारावास, न्यायालय ने लगाया बराबर राशि का अर्थदंड
रिपोर्टर – शैलेंद्र जोशी, कोयलांचल समाचार
धार। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित शक्ति इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड में लगभग दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और गबन के मामले में न्यायालय ने कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट राघव राजपूत को कड़ी सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा दी है तथा 1 करोड़ 97 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में इस प्रकार के आर्थिक अपराध में इतनी बड़ी राशि के बराबर जुर्माना लगाने का यह एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शक्ति इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत सीनियर अकाउंटेंट राघव राजपूत ने सुनियोजित तरीके से कंपनी के खातों से लगभग 1 करोड़ 97 लाख रुपये की राशि जालसाजी कर अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर ली थी। यह राशि कंपनी द्वारा विभिन्न वेंडरों को भुगतान करने के लिए निर्धारित की गई थी। आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनी के खातों से रकम निकालकर उसे एसबीआई और एचडीएफसी बैंक के अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कंपनी की वार्षिक लेखाबंदी और वित्तीय जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। जांच के दौरान खातों में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद कंपनी प्रबंधन ने विस्तृत पड़ताल कराई। जांच में सीनियर अकाउंटेंट की भूमिका सामने आने पर कंपनी के विधिक सलाहकार द्वारा पीथमपुर थाने में आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज कराया गया।
शासकीय अभिभाषक शरद राजपुरोहित ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 80 से अधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज न्यायालय में पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हो सके।
न्यायालय ने भारतीय दंड विधान की धारा 467, 468, 473 और 408 के तहत आरोपी को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में अलग-अलग कारावास की सजा सुनाई तथा गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास से दंडित किया। साथ ही आरोपी पर 1 करोड़ 97 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह राशि कंपनी को विधिक प्रक्रिया के तहत वसूल करने का अधिकार रहेगा।
इस फैसले को आर्थिक अपराधों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में इस प्रकार के वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।






