केन्द्रीय वेतनमान की मांग हुई तेज प्लेसमेंट कर्मचारियों ने शासन को दिया 15 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

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मनेन्द्रगढ़। नगरीय निकायों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों का लंबे समय से लंबित वेतनमान का मुद्दा अब आंदोलन की राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक केन्द्रीय वेतनमान लागू करने संबंधी आदेश जारी नहीं किया गया तो वे चरणबद्ध आंदोलन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।

महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ यादव के नेतृत्व में सौंपे गये ज्ञापन में लेख किया गया है की भारत सरकार द्वारा देशभर में श्रम सुधार के तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नये श्रम कोड लागू किये गये हैं। इन नये श्रम कोड का उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और समान कार्य के लिये समान वेतन सुनिश्चित करना है।

इस संबंध में संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सौरभ यादव ने बताया की केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से सभी राज्यों में श्रमिकों को केन्द्रीय दर पर वेतनमान लागू करने की घोषणा की गई है लेकिन छत्तीसगढ़ में इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल या स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आया है। इस स्थिति से नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों प्लेसमेंट कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें जो वेतन और सुविधाएं मिल रही हैं वे केन्द्रीय मानकों की तुलना में काफी कम हैं। महंगाई के इस दौर में सीमित आय के कारण उन्हें परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि समान कार्य करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता बनी हुई है।

महासंघ ने अपने ज्ञापन के माध्यम से शासन से मांग की है कि नये श्रम कोड के तहत केन्द्रीय दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिये जल्द से जल्द सर्कुलर जारी किया जाये ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके और उनके साथ हो रहे आर्थिक अन्याय को समाप्त किया जा सके। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं होती है तो पहले चरण में प्रदर्शन और ज्ञापन, दूसरे चरण में कार्य बहिष्कार और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाये जाएंगे। इस संभावित हड़ताल का सीधा असर नगरीय निकायों की दैनिक सेवाओं पर पड़ सकता है।

फिलहाल इस पूरे मामले में शासन की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन कर्मचारियों के तेवरों को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।

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