पीएचडी से बर्खास्तगी और दर्ज एफआईआर को बताया झूठा, उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग
अनूपपुर।
अमरकंटक स्थित Indira Gandhi National Tribal University में पीएचडी शोध छात्रों और कुछ प्रोफेसरों के बीच विवाद का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। स्वयंसेवक शोध छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पीएचडी कोर्स से बर्खास्त कर हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है तथा उनके खिलाफ अमरकंटक थाने में झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस मामले में छात्रों ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav सहित जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषी प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शोध छात्रों आर्यन कुमार गर्ग, सुरेश यादव, अभय यादव, ब्रिजेश यादव, राहुल कुमार पाल, दयाशंकर मिश्रा, रितिक कुमार, अनिकेत सिंह, शिवेंद्र कुमार तिवारी और कुमार मंगलम ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में शाखा लगाने से संबंधित सामान जब्त कर लिया गया और हॉस्टल के कमरों में लगी भारत माता की तस्वीरों को भी नुकसान पहुंचाया गया। छात्रों ने इसे उनके साथ अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
छात्रों का आरोप है कि कुछ प्रोफेसरों ने संगठित रूप से षड्यंत्र कर उनके खिलाफ झूठी शिकायतें और एफआईआर दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के सीसीएस नियमों और डीओपीटी निर्देशों के अनुसार सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी सामूहिक धरना-प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल नहीं हो सकते, लेकिन इसके बावजूद कुछ प्रोफेसरों द्वारा संगठन बनाकर आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया गया, जो सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध है।
मामले को लेकर छात्रों ने दावा किया है कि संबंधित घटनाओं से जुड़े वीडियो, व्हाट्सएप चैट और फोटोग्राफ भी साक्ष्य के रूप में भेजे गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि कार्य परिषद के सदस्यों और छत्तीसगढ़ भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री मोरध्वज पैकरा को भी दी गई है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रोफेसरों और अन्य लोगों द्वारा विश्वविद्यालय के ओबीसी ट्रांजिट हॉस्टल के उपयोग को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं की गई हैं। उनका कहना है कि यह छात्रावास छात्रों के लिए बनाया गया था, लेकिन उसमें अन्य लोगों के रहने का आरोप है।
उधर अमरकंटक थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत शोध छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला और पेचीदा हो गया है। छात्रों का कहना है कि एफआईआर के तथ्य विरोधाभासी हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
शोध छात्रों ने राष्ट्रपति से विजिटर के अधिकार का उपयोग कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।


















