20 साल से नहीं हुई बदरा की पानी टंकी की सफाई! इंदौर जैसी घटना का खतरा, दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

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20 साल से नहीं हुई बदरा की पानी टंकी की सफाई! इंदौर जैसी घटना का खतरा, दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

जमुना–कोतमा
अनूपपुर जिले के नेशनल हाईवे-43 पर स्थित ग्राम पंचायत बदरा में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है यहां बस स्टैंड के पास लगभग 20 वर्ष पूर्व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा एक बड़ी पानी टंकी का निर्माण कराया गया था, जिससे पूरे गांव में पेयजल की आपूर्ति की जाती है लेकिन हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों के अनुसार टंकी बनने के बाद से इसकी नियमित सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण लोगों को दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है

ग्रामीणों का कहना है कि टंकी की वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण उसके अंदर गंदगी, कचरा और पक्षियों के अवशेष जमा होने की आशंका बनी रहती है कई बार नल से आने वाले पानी में गंदगी दिखाई देने की शिकायत भी सामने आई है ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या की ओर न तो ग्राम पंचायत ने गंभीरता दिखाई और न ही पीएचई विभाग ने अब तक कोई ठोस पहल की

गांव के निवासी ओमप्रकाश तिवारी उर्फ लाल ने बताया कि पिछले करीब 7 वर्षों से टंकी की सफाई नहीं कराई गई है उन्होंने कहा कि कई बार पानी में कचरा और कबूतर के मांस जैसे अवशेष भी दिखाई दिए हैं इस मामले की शिकायत 181 पर भी की गई और ग्राम पंचायत को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है उनका कहना है कि दूषित पानी के कारण गांव में पहले भी बीमारियां फैलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों में डर और चिंता का माहौल है

वहीं त्रिवेणी शंकर तिवारी (एडवोकेट) ने भी टंकी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लगभग 7 से 8 वर्षों से इसकी सफाई नहीं कराई गई है उन्होंने आशंका जताई कि टंकी के अंदर कचरा, पक्षियों या अन्य जीव-जंतुओं के अवशेष गिरकर पानी को दूषित कर सकते हैं उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि टंकी की तत्काल सफाई कराकर पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और पानी को शुद्ध करने के लिए आवश्यक रसायनों का उपयोग किया जाए

ग्रामीण झूलन केवट का कहना है कि जब से टंकी बनी है तब से इसकी सफाई होते नहीं देखी गई उन्होंने कहा कि गांव के लोग वर्षों से इसी टंकी के पानी पर निर्भर हैं, इसलिए इसकी नियमित सफाई और रखरखाव अत्यंत जरूरी है

वहीं केस्टो मुखर्जी ने भी चिंता जताते हुए कहा कि गांव में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सेहत को देखते हुए टंकी की सफाई बेहद आवश्यक है यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो दूषित पानी से बड़ी बीमारी फैलने का खतरा बना रहेगा

हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत की घटना सामने आई थी, जिसके बाद बदरा के ग्रामीण भी अपनी पेयजल व्यवस्था को लेकर काफी चिंतित हैं ग्रामीणों का कहना है कि यदि टंकी की समय-समय पर सफाई और पानी की जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में यहां भी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीएचई विभाग से मांग की है कि बदरा की पानी टंकी की तत्काल सफाई कराई जाए, पानी की गुणवत्ता की जांच की जाए और भविष्य में नियमित रूप से टंकी के रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गांववासियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके

इनका कहना है
इस संबंध में जब ग्राम पंचायत बदरा के सरपंच से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 20 वर्षों से टंकी की सफाई नहीं हुई है वे अभी वर्तमान कार्यकाल में सरपंच बने हैं और टंकी की सफाई कराने के लिए बुढार, कोतमा सहित कई स्थानों पर संपर्क किया गया, लेकिन जोखिम के कारण कोई मजदूर सफाई करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है उन्होंने बताया कि टंकी काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है तथा अंदर की लोहे की रॉड भी गल चुकी हैं, जिससे मजदूरों के लिए नीचे उतरकर सफाई करना खतरे से खाली नहीं है फिर भी टंकी की सफाई कराने के लिए प्रयास जारी हैं और पीएचई विभाग को भी इसकी जानकारी दे दी गई है

शिवभान सिंह, सरपंच, ग्राम पंचायत बदरा

इनका कहना है
पीएचई विभाग अनूपपुर के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि बदरा की पानी टंकी का संचालन पंचायत द्वारा किया जाता है उन्होंने कहा कि संबंधित एई को निर्देश देकर सरपंच से बात कर टंकी की सफाई कराई जाएगी टंकी में सफाई के लिए अलग पाइप की व्यवस्था रहती है और मजदूरों के माध्यम से इसकी सफाई कराई जा सकती है विभाग इस मामले को दिखवाकर आवश्यक कार्रवाई करेगा

अमित शाह, कार्यपालन अभियंता, पीएचई विभाग अनूपपुर

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