फ़लस्तीन से लौटे विनीत तिवारी बोले — इज़रायल कर रहा फ़लस्तीनियों का नस्लीय नरसंहार
“फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा”
इंदौर, 26 नवंबर।प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने फ़लस्तीन यात्रा से लौटकर कहा कि इज़रायल ने फ़लस्तीनियों पर 75 वर्षों से नस्लभेदी हिंसा थोप रखी है और आज भी मूल फ़लस्तीनी—चाहे ईसाई हों या मुसलमान—अपमान और उत्पीड़न के बीच ज़िंदगी जीने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि फ़लस्तीन में हालात इतने भयावह हैं कि बेथलहम से दस किलोमीटर दूर जेरुसलम जाने तक के लिए दर्जनों चेकपोस्टों और अपमानजनक जाँच से गुजरना पड़ता है। इज़रायल ने फ़लस्तीनियों के लिए अलग सड़कें, अलग नंबर प्लेटें और कई जगह 8 मीटर ऊँची दीवारें खड़ी कर रखी हैं।
विनीत तिवारी दस दिनों तक वेस्ट बैंक के कई शहरों और गाँवों में रहे। उन्होंने बताया कि इज़रायली सेना फ़लस्तीनी किसानों की जैतून की फसलें, मवेशी और ज़मीनें छीन लेती है। वेस्ट बैंक में हो रहा दमन ‘धीमी हत्या’ जैसा है, जबकि गाज़ा में हालात नरसंहार का रूप ले चुके हैं—जहाँ अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं, इमारतें खंडहर हो चुकी हैं और लोग पानी, दवाइयों और भोजन के लिए तरस रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी इज़रायली नागरिक सरकार की नस्लभेदी नीतियों के समर्थक नहीं हैं। कई इज़रायली भी फ़लस्तीन के हक़ की लड़ाई में साथ खड़े हैं। विनीत की मुलाकात ऐसे कई कार्यकर्ताओं और सांसदों से भी हुई। उन्होंने बताया कि फ़लस्तीन का संकट ब्रिटिश शासन और 1948 के बँटवारे की देन है, जिसने अन्यायपूर्ण तरीक़े से फ़लस्तीन की ज़मीन यहूदियों को सौंप दी।
सभा में विनीत ने फ़ोटो और वीडियो के माध्यम से फ़लस्तीन की वास्तविक स्थिति साझा की और कहा कि फ़लस्तीन की सच्चाई दुनिया तक पहुँचना ज़रूरी है, ताकि नस्लभेदी दमन का अंत हो सके। उन्होंने कहा कि भारत स्वयं उपनिवेशवाद का शिकार रहा है, इसलिए फ़लस्तीन की आज़ादी के संघर्ष का समर्थन मानवता का धर्म है।
कार्यक्रम का संचालन सारिका श्रीवास्तव ने किया तथा आभार हरनाम सिंह ने व्यक्त किया
हरनाम सिंह


















