शिष्यों की सफलता से मिलता है परम आनंद- वर्मा
जनकपुर में आयोजित हुआ गुरु शिष्य संवाद
मनेन्द्रगढ़/जनकपुर। अपने शिष्यों की सफलता पर जो आनंद प्राप्त होता है वही एक शिक्षक के लिए सच्चा सुख है।
शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में आयोजित व्यास पूजा (गुरु शिष्य संवाद) के अवसर पर अपना उद्बोधन देते हुए संस्था प्रमुख प्राचार्य अतुल कुमार वर्मा ने कहा कि हमें अपनी परम्पराओं एवं रीति रिवाजों पर गर्व होना चाहिए और आधुनिकता के इस दौर में अपने प्राचीन संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए। इसके साथ ही वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली तथा वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की।
सेवानिवृत्त प्रधानपाठक शिवकुमार शर्मा ने मुख्य वक्ता की आसंदी से वैदिक काल से आज तक की गुरु शिष्य परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इसी तारतम्य में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी परमानंद ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु की भूमिका एवं महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन में गुरु का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि गुरु ही हमें जीवन का मार्ग दिखाते हैं और हमें बेहतर उद्देश्य पूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक महावीर पैकरा ने बताया कि गुरु के सानिध्य में रहने वाले विद्यार्थियों के आचरण एवं उनके व्यक्तित्व में गुणात्मक परिवर्तन होता है जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बनते हैं और जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं।
इस अवसर पर बीए तृतीय वर्ष की छात्रा दुर्गा यादव,रवीना मौर्य, मालती बैगा, सृष्टि केवट, प्रियंका बैगा ने भी गुरुओं के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के आई क्यू ए सी समन्वयक
डॉ विनीत कुमार पाण्डेय, डॉ दीपशिखा पटेल, आशुतोष वर्मा,मोनिका मिश्रा,महरोज बेगम, गीतिका वर्मा, रागिनी नामदेव,ओमिला पटेल,श्रेया सिंह, शालिनी यादव, प्रिया साहू, प्रतिभा सिंह, शालिनी यादव, तूफान सिंह, हिमांशु सिंह, सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।


















