यूरोप से लौटे प्रतिनिधिमंडल ने की आचार्य श्री प्रणम्य सागर जी महाराज से भेंट
श्री मतंगेश्वर सेवा समिति एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर, खजुराहो के प्रतिनिधि पंडित सुधीर शर्मा के तत्वावधान में अर्हम ध्यान योग के यूरोपीय सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल महावीर दिगंबर जैन मंदिर, रोहिणी (दिल्ली) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं अर्हम ध्यान योग के संस्थापक आचार्य श्री प्रणम्य सागर जी महाराज से सौजन्य भेंट के लिए पहुँचा।
प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य श्री को यूरोप में चार महीनों तक संचालित योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं की विस्तृत जानकारी दी।
आचार्य श्री ने इस समर्पण और सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि
अर्हम ध्यान योग आत्मशुद्धि, करुणा और वैश्विक शांति की दिशा में भारतीय साधना परंपरा का एक प्रकाशपुंज है
भेंट के दौरान फ्रांस के दोंड ग्रुप के रईस भारती भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि वे अब तक 119 देशों में बुंदेलखंड और राजस्थान की लोककलाओं व संगीत परंपरा का प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अब आगे इन सभी देशों में अर्हम ध्यान योग के प्रचार-प्रसार के लिए भी कार्य करेगी, जिससे भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक जड़ें विश्व भर में और गहरी हों।
सभी सदस्यों ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर खजुराहो आगमन का निमंत्रण भी प्रदान किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने स्मरण कराया कि अर्हम ध्यान योग का प्रथम सार्वजनिक कार्यक्रम खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित हुआ था। उन्होंने बताया कि खजुराहो की पवित्र भूमि से अर्हम ध्यान योग की यात्रा प्रारंभ हुई थी, और आज यह योग विश्व के अनेक देशों में लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है।”
यह सौहार्दपूर्ण भेंट भारतीय संस्कृति, योग एवं ध्यान परंपरा के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुई।


















