अफरा-तफरी मच गई जब हम्माल-तुलावटी मजदूरों ने बिना किसी पूर्व सूचना के अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। हजारों किसान अपनी धान की उपज लेकर सुबह से ही मंडी पहुंचे थे, लेकिन पल्लेदारों द्वारा अचानक काम बंद कर देने से तुलाई और उठाव पूरी तरह रुक गया। नाराज़ किसानों ने मंडी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए कि यदि मजदूर हड़ताल पर जाने वाले थे तो इसकी पूर्व सूचना किसानों को क्यों नहीं दी गई। इसी रोष में किसानों ने मंडी गेट के बाहर भितरवार रोड को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। बताया जा रहा है कि पल्लेदारों और मंडी प्रशासन के बीच फरवरी 2025 तक अनुबंध प्रभावी है, फिर भी अचानक हड़ताल ने सबको चौंका दिया।
डबरा कृषि उपज मंडी में बुधवार सुबह का माहौल अचानक बदल गया, जब अपनी उपज लेकर पहुंचे किसानों को पता चला कि पल्लेदारों ने बिना किसी चेतावनी के काम बंद कर दिया है। हजारों किसानों की ट्रॉलियाँ और ट्रैक्टर मंडी परिसर में लाइन से खड़े रहे लेकिन तुलाई शुरू न होने के कारण किसानों में गहरा आक्रोश फैल गया। कुछ किसान अपनी मेहनत की फसल को ढेरों घंटे तक ट्रॉली में ही संभालते रहे, जबकि कई किसान मजबूरी में कम दामों पर अपनी धान व्यापारियों को बेचने को विवश दिखाई दिए।
हड़ताल की जानकारी मिलते ही किसानों ने मंडी गेट के बाहर भितरवार रोड पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया, जिससे सड़क पर लंबा जाम लग गया और राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। किसानों का कहना है कि जब पल्लेदारों और मंडी प्रशासन के बीच 28 फरवरी 2025 तक अनुबंध प्रभावी है, तो फिर अचानक हड़ताल क्यों की गई और प्रशासन ने किसानों को पहले से जानकारी क्यों नहीं दी।
इधर मंडी सचिव पर्वत लाल ने स्पष्ट किया कि किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने की स्वतंत्रता दे दी गई है। उन्होंने कहा कि सौदा-पत्र के आधार पर व्यापारियों से टैक्स की कटौती की जाएगी, ताकि राजस्व व्यवस्था बाधित न हो। लेकिन हड़ताल के चलते बुधवार को मंडी को टैक्स के रूप में लाखों रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि किसानों का पूरा दिन परेशानी में बीता।


















