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स्मरण ज्ञान रंजन- श्रद्धांजलि सभा का आयोजन पहल के संपादक ज्ञान रंजन जी ने नए लेखक तैयार किए

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स्मरण ज्ञान रंजन- श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

पहल के संपादक ज्ञान रंजन जी ने नए लेखक तैयार किए

इंदौर। विगत दिनों हमारे समय के महान कथाकार ज्ञान रंजन का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर कई द्वारा एक श्रद्धांजलि सभा स्मरण ज्ञान रंजन का आयोजन रखा गया अभिनव कला समाज पुस्तकालय में आयोजित शोक सभा में वक्ताओं ने उनके भरपूर सक्रिय सांस्कृतिक जीवन, उनकी कहानियों और प्रलेसं के लिए किए गए सांगठनिक कार्यों को याद किया।
प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने अपनी स्मृति में ज्ञान जी के साथ बिताए समय और मुलाकातों को याद किया उन्होंने कहा कि ज्ञान जी ने प्रगतिशील लेखक संघ के शिविरों और पत्रिका पहल के माध्यम से नये लेखक तैयार किये, उन्हें वैज्ञानिक चेतना और पदार्थवादी मार्क्सवादी नज़रिया और सौंदर्यशास्त्र देने की कोशिश की, उन्होंने साम्प्रदायिक व साम्राज्यवादी साज़िशों के साथ ही मौकापरस्ती पर भी कठोर प्रहार किए।
वर्ष 1995-96 में मांडव गढ़ में कृष्णकांत निलोसे जी के प्रबंधन में एक कविता-शिविर लगाया गया था, जिसमें ज्ञान रंजन जी के अलावा चंद्रकांत देवताले, राजेन्द्र शर्मा, कुमार अम्बुज, पवन करण, अनिल करमेले, रवीन्द्र व्यास, विवेक गुप्ता, आशीष त्रिपाठी आदि के साथ मैं भी शामिल हुआ था। शिविर में संदीप श्रोत्रिय, प्रतापराव कदम, सूर्यकांत नागर आदि भी आये थे। वह शिविर हम सबके लिए यादगार रहा और अभी तक हमारे रचनात्मक जीवन में वह स्मृतियाँ हम सबकी निधि हैं। ज्ञान जी एक मनुष्य थे, देवता नहीं उस नाते उनसे भी गलतियाँ हुईं होंगी, लेकिन वे अपनी कमियों और खूबियों के साथ बहुत प्यारे इंसान थे। उनसे कुछ महीनों पहले ही नागपुर में मुलाक़ात भी हुई थी, तब वे बांग्लादेश के हालात से परेशान थे। विनीत तिवारी ने उनकी कहानी का पाठ भी किया।

शोभना जोशी ने कहा की ज्ञान जी की कहानियों में मध्यवर्गीय मानसिकता का अच्छा चित्रण हुआ है। उनकी कहानियां रुचिकर और मानक है। कहानी कला को आगे बढ़ाने, वाक्य गठन में उन्हें महारथ हासिल थी। पहल पत्रिका प्रकाशित कर उन्होंने ऐतिहासिक कार्य किया।
सारिका श्रीवास्तव ने अपने विद्यार्थी जीवन में ज्ञान जी से हुई मुलाकात का जिक्र किया। ओमप्रकाश खटके ने ज्ञान जी के इंदौर आगमन पर कामरेड होमी दाजी के यहां मुलाकात को याद किया। देवास से आए कैलाश सिंह राजपूत, विजय दलाल, अभय नेमा,हरनाम सिंह ने अपने संस्मरण में ज्ञान जी को याद किया। श्रद्धांजलि सभा में इप्टा की जया मेहता, देवास की प्रतिभा कुमार, राजेंद्र राठौड़ ने भी शिरकत की।

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