मनेन्द्रगढ़। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल मनेन्द्रगढ़ में विज्ञान आधारित गतिविधियों, प्रयोगों और ज्ञानवर्धक सत्रों का भव्य आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर दिनभर वैज्ञानिक जिज्ञासा, उत्साह और नवाचार की ऊर्जा से सराबोर रहा। कार्यक्रम में विशेष रूप से कक्षा 3 के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और सरल प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने का प्रयास किया।
*विज्ञान: जिज्ञासा से खोज तक की यात्रा*
कार्यक्रम की शुरुआत विज्ञान के महत्व पर परिचर्चा से हुई जिसमें विद्यार्थियों को बताया गया कि विज्ञान केवल एक विषय नहीं बल्कि सोचने और समझने का तरीका है। महान वैज्ञानिक सी वी रमन के जीवन और उनकी ऐतिहासिक खोज ‘रमन प्रभाव’ के बारे में रोचक जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों को सम्मान देना और नई पीढ़ी में वैज्ञानिक चेतना विकसित करना है।
*प्रयोगों के माध्यम से सीखने की अनूठी पहल*
इस अवसर पर “घुलनशील और अघुलनशील पदार्थ” विषय पर प्रयोगात्मक गतिविधि आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने पानी में नमक, चीनी और मिट्टी मिलाकर अवलोकन किया कि कौन-सी वस्तुएँ पूरी तरह घुल जाती हैं और कौन-सी तल में बैठ जाती हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने निष्कर्ष निकाला कि पदार्थों की प्रकृति के अनुसार उनका व्यवहार भिन्न होता है।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को अवलोकन, अनुमान और निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया भी सिखाई गई जिससे उनमें तार्किक क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच का विकास हो सके।
*वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का संकल्प*
विद्यालय की निदेशिका श्रीमती पूनम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युग में बच्चों को रटने के बजाय समझने और प्रयोग करने की आदत डालना आवश्यक है। इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करती हैं। पीजीटी बायोलॉजी मिस रोशन खान ने कहा कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का आधार है चाहे वह बिजली हो, मोबाइल फोन हो या चिकित्सा क्षेत्र की प्रगति। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रश्न ही बड़े आविष्कारों की नींव रखते हैं।
*अनुभव साझा कर बढ़ाई जागरूकता*
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किये और बताया कि प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाई करना उन्हें अधिक रोचक और समझने योग्य लगा। शिक्षकों ने बच्चों को भविष्य में भी प्रश्न पूछने और नई चीज़ें जानने के लिये प्रोत्साहित किया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के इस आयोजन ने ना केवल विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि जगाई बल्कि उन्हें यह संदेश भी दिया कि जिज्ञासा ही ज्ञान का प्रथम कदम है। विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी इस प्रकार की प्रयोगात्मक और नवाचार आधारित गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जायेगा।
