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500 जिलों में गूंजा विरोध! एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह के नेतृत्व में मजदूर-किसान नीतियों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन

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500 जिलों में गूंजा विरोध! एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह के नेतृत्व में मजदूर-किसान नीतियों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन

 

नई दिल्ली

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आज राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें 500 से अधिक जिलों में मजदूरों, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों ने भारी संख्या में भाग लिया। इस व्यापक आंदोलन को दिशा देने में आई.पी.एस. के कामरेड हरिद्वार सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (एटक) की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने अपने संबोधन में सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा हमला बोला

 

कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार कॉर्पोरेट-हितैषी फैसलों से श्रमिकों, किसानों और गरीब तबकों को असुरक्षा की ओर धकेल रही है उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपनी नीतियाँ वापस नहीं लीं, तो आंदोलन और अधिक तेज़ी से चलेगा

 

कानून में बदलाव और श्रमिक सुरक्षा पर हमला—यूनियनों का आरोप

 

यूनियनों ने आरोप लगाया कि नए श्रम कानून मजदूर सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं और स्थायी रोजगार को खत्म कर असुरक्षा बढ़ा रहे हैं। फिक्स्ड टर्म रोजगार, ठेका प्रथा और निजीकरण को बढ़ावा देने से रोजगार की स्थिरता समाप्त हो रही है, जबकि औद्योगिक संबंध कानून में संशोधनों ने ट्रेड यूनियनों की शक्ति सीमित कर दी है संगठनों का कहना है कि न्यूनतम मजदूरी, बोनस, सामाजिक सुरक्षा और कार्य-स्थितियों पर लगातार हो रहे प्रहार से करोड़ों श्रमिकों का भविष्य जोखिम में है और सरकार की नीतियाँ प्रत्यक्ष रूप से श्रम अधिकारों पर हमला साबित हो रही हैं

 

महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी

 

प्रदर्शन में देशभर से आई महिला मजदूरों, खेत-मजदूरों, औद्योगिक श्रमिकों और युवा संगठनों ने जोरदार उपस्थिति दर्ज की। कई स्थानों पर रैलियाँ, मशाल जुलूस और पदयात्राएँ निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने 300 दिनों की कार्य-सीमा, निजीकरण, अस्थायी नियुक्तियों और सामाजिक सुरक्षा में कटौती के खिलाफ जोरदार नारे लगाए

 

सरकारी नीतियों पर उठे सवाल

 

यूनियनों ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण, रोजगार के अवसरों में कमी, वेतन-भत्तों में कटौती और सामाजिक सुरक्षा ढांचे को कमजोर किया जाना देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे के लिए घातक है। कहा गया कि सरकार मजदूरों की समस्याएँ सुलझाने की बजाय कॉर्पोरेटों के पक्ष में फैसले ले रही है

 

मजदूर-किसान एकता ही संघर्ष की ताकत: कामरेड हरिद्वार सिंह

 

कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा कि देश को बचाने के लिए मजदूर-किसान-युवा-महिला—सभी वर्गों की एकता अनिवार्य है। उन्होंने मजदूरों और किसानों से अपील की कि वे अपने मूल अधिकार—शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सम्मानजनक मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता—की रक्षा के लिए मजबूत संघर्ष जारी रखें

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