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IAS संतोष वर्मा के विवादित बयान पर देशभर में आक्रोश वरिष्ठ अधिवक्ता विकस पाराशर ने CM व मुख्य सचिव को भेजी 14-पन्नों की शिकायत, FIR व निलंबन की मांग

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IAS संतोष वर्मा के विवादित बयान पर देशभर में आक्रोश

वरिष्ठ अधिवक्ता विकस पाराशर ने CM व मुख्य सचिव को भेजी 14-पन्नों की शिकायत, FIR व निलंबन की मांग

 

भोपाल/अनूपपुर/मथुरा। AJAKS के प्रांतीय अध्यक्ष व IAS अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज के विरुद्ध दिए गए विवादित बयान के बाद प्रदेशभर में भारी विरोध जारी है। अब इस मामले में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं ब्राह्मण जागृति मिशन ट्रस्ट के संस्थापक–ट्रस्टी विकस पाराशर ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और भारत सरकार के DoPT सचिव को विस्तृत शिकायत भेजते हुए तत्काल विभागीय, दांडिक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है

 

अजाक्स सम्मेलन में दिया था विवादित बयान

 

23 नवंबर 2025 को भोपाल के अंबेडकर मैदान में हुए AJAKS राज्य सम्मेलन में IAS संतोष वर्मा ने आरक्षण मुद्दे पर वक्तव्य देते हुए कहा कि

“जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान नहीं देता, तब तक आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए

 

इस बयान को समाज ने जातीय उकसावे, अपमान और असंवैधानिक टिप्पणी करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है

अधिवक्ता विकस पाराशर ने आरोपों के साथ भेजी विस्तृत शिकायत

 

अपनी शिकायत में अधिवक्ता विकस पाराशर ने कहा कि—

 

यह वक्तव्य ब्राह्मण समाज के सम्मान पर सीधा हमला है

 

एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का यह बयान घृणा भाषण (Hate Speech) की श्रेणी में आता है

 

इससे समाज में वैमनस्य, तनाव और विभाजन पैदा हुआ है

 

यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 और 25 का उल्लंघन है।

 

All India Services (Conduct) Rules, 1968 के कई नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है

 

धर्मशास्त्रों का हवाला—“ब्राह्मण कन्या के विवाह पर टिप्पणी अस्वीकार्य”

 

पाराशर ने अपने पत्र में धर्मशास्त्रों — मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, पराशर स्मृति आदि — का संदर्भ देते हुए लिखा है कि भारतीय संस्कृति में कन्या को सम्मानित स्थान दिया गया है

उन्होंने कहा कि

“किसी अधिकारी द्वारा ब्राह्मण कन्या के विवाह-विधान में हस्तक्षेप करना धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा का घोर उल्लंघन है

 

पुराने विवाद भी उठाए—CBI जांच व महिला शिकायतों का उल्लेख

 

शिकायत में संतोष वर्मा के पिछले विवादित मामलों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें—

 

फर्जी दस्तावेजों के आरोप,

 

न्यायिक अधिकारी की शिकायत पर गिरफ्तारी,

 

दो महिलाओं द्वारा धमकी व शोषण की शिकायतें शामिल हैं

 

पाराशर ने कहा है कि ऐसे इतिहास वाले अधिकारी द्वारा इस प्रकार का बयान सेवा की तटस्थता और विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है

 

माँगें—FIR, निलंबन और कठोर विभागीय कार्रवाई

 

शिकायत में सरकार से निम्न मांगें की गई हैं—

1. IAS संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

2. IAS (Discipline & Appeal) Rules के तहत तुरंत निलंबित किया जाए।

3. बड़ी दंडात्मक कार्यवाही (Major Penalty Proceedings) शुरू की जाए।

4. केंद्र व राज्य सरकारें भविष्य में ऐसे बयानों पर रोक लगाने के लिए संयुक्त परिपत्र जारी करें।

5. कार्रवाई की प्रगति की लिखित सूचना शिकायतकर्ता को दी जाए

संगठनों व सामाजिक वर्गों में गहरा रोष

 

IAS अधिकारी के बयान के बाद ब्राह्मण समाज, कर्मचारी संघ, कई सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल कड़े शब्दों में विरोध जता चुके हैं।

समाज का कहना है कि ऐसी टिप्पणियाँ सार्वजनिक शांति और सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक हैं

 

सरकार से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद

 

विकस पाराशर ने कहा है कि वे इस मामले में ठोस कदम की अपेक्षा करते हैं, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी किसी समुदाय की बेटियों या निजी जीवन पर अपमानजनक टिप्पणी न कर सके

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