OPM पेपर मिल बना मानव और पशु जीवन के लिए खतरा

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जन जीवन लाचार, जिम्मेदारों को क्यों नहीं सरोकार..?

 

• बकहो नरगड़ा नाले से होते, गांवों तक पहुंच रहा केमिकल युक्त प्रदूषित पानी!

• किसानों की जमीन बंजर होने की कगार पर!

• मनुष्य और मवेशियों के जान और स्वास्थ्य पर खतरा!

 

शहडोल। जिले के अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल एक बार फिर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर सवालों के घेरे में है। बता दें कि, मिल प्रबंधन बिना शोधन के केमिकल युक्त और दुर्गंधयुक्त पानी सीधे नाले से लेकर सोन नदी में छोड़ रहा है। जिससे आसपास के गांवों और खेती पर गंभीर असर पड़ रहा है

 

 

जानकारी के अनुसार, मिल से निकलने वाला यह दूषित पानी लगभग दो किलोमीटर दूर बकहो क्षेत्र में स्थित नरगड़ा नाले में जाकर मिल रहा है। यही नाला आगे चलकर सोन नदी में समाहित हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में जहरीला पानी गांवों के पास से होकर गुजरता है, जिससे स्थानीय जनजीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

 

जानलेवा हो रहा साबित

 

ग्रामीणों ने बताया कि, इस प्रदूषित पानी के कारण खेतों की उर्वरक क्षमता लगातार घटती जा रही है। जिन खेतों में पहले अच्छी फसल होती थी, अब वहां उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है। किसानों का आरोप है कि, केमिकल युक्त पानी मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहा है। जिससे लंबे समय में खेती पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब.. ग्रामीण बताते हैं कि, इस पानी को पीने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। गांव के पास से गुजरने वाले इस नाले का पानी जानवरों और हमारे लिए के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इसके बावजूद मिल प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

 

 

पर्यावरण विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पाण्डेय के अनुसार, किसी भी औद्योगिक इकाई को बिना एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) या ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के माध्यम से जल का शोधन किए बिना, उसे प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस तरह का कृत्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

बताया जा रहा है कि, ओरिएंट पेपर मिल इन नियमों की अनदेखी करते हुए सीधे प्रदूषित पानी नदी में छोड़ रहा है। यह न केवल पर्यावरण बल्कि, मानव और पशु जीवन के लिए भी खतरा बन गया है।

 

स्थिति और हो सकती है भयावह

 

सबसे हैरानी की बात यह है कि, इस पेपर मिल से महज 25 किलोमीटर दूर संभागीय मुख्यालय में ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय मौजूद है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर प्रदूषण फैलने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, या तो संबंधित विभाग गहरी नींद में है या फिर मिल प्रबंधन से मिलीभगत के चलते अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

 

कार्रवाई का है इंतजार

 

ओरिएंट पेपर मिल अमलाई का शासन के नियमों का उल्लंघन केवल एक औद्योगिक लापरवाही का मामला नहीं हैं। बल्कि, यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर विषय भी है। अब देखना यह होगा कि, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं।

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