भटगांव अस्पताल में चार घंटे तक न डॉक्टर, न नर्स… फर्श पर बच्चे को जन्म देने को मजबूर महिला
ब्यूरो: आनंद शर्मा
सूरजपुर ज़िले के भैयाथान विकासखंड के भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 9 अगस्त को एक ऐसी घटना घटी, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। एक गर्भवती महिला, सास के साथ प्रसव कराने अस्पताल पहुंची—लेकिन चार घंटे तक अस्पताल में न कोई डॉक्टर था, न नर्स, न कोई स्वास्थ्यकर्मी।
चार घंटे के दर्द और इंतजार के बाद महिला को मजबूरी में अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। खून से सने फर्श को खुद अपने हाथों से साफ करती प्रसूता, बच्चे को बेड पर लिटाकर खुद ज़मीन पर बैठी—ये नज़ारा न सिर्फ दर्दनाक था, बल्कि सिस्टम की बेरहमी का जीता-जागता सबूत भी।
अस्पताल बना सुनसान चौकी
महिला के साथ-साथ भटगांव निवासी जितेंद्र जायसवाल भी उसी समय अपने परिचित को रेबीज़ का इंजेक्शन दिलाने पहुंचे, लेकिन उन्हें भी एक भी जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिला। डॉक्टरों को फोन किया गया—पर किसी ने कॉल रिसीव करना जरूरी नहीं समझा।
मंत्री के क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवा
विडंबना यह कि यह अस्पताल भटगांव विधानसभा मुख्यालय में है, जहां की विधायक खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े हैं। यहां स्टाफ का समय पर न आना आम बात है। कई बार मरीज इलाज के इंतजार में जान गंवा चुके हैं। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर राकेश सिंह ने जांच का भरोसा दिया है, लेकिन यहां सभी जानते हैं कि ‘जांच’ का मतलब है—फाइल अलमारी में डाल देना और फिर वही लापरवाही दोहराना।
सरगुजा संभाग के स्वास्थ्य मंत्री पर भी सवाल
सबसे हैरानी की बात यह है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी इसी सरगुजा संभाग से हैं। अगर विधानसभा मुख्यालय के अस्पताल की ये हालत है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।
सवाल सीधा है—क्या इस गरीब महिला को न्याय मिलेगा?या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह जांच और ‘कार्रवाई’ के वादों में दफन हो जाएगा, जबकि डॉक्टर-माफिया गरीबों की जिंदगी से खेलते रहेंगे?


















