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मुरेरगढ़—रहस्य, रोमांच और आस्था का संगम एमसीबी जिले का प्राकृतिक हिल स्टेशन बनने की ओर अग्रसर

By Santosh Chaurasiya

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एमसीबी। मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले की गोद में स्थित मुरेरगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था के कारण एक विशिष्ट पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। लगभग 2000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पहाड़ी एमसीबी जिले की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है और प्राकृतिक हिल स्टेशन के रूप में पहचान बना रही है। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ से लगभग 105 किलोमीटर दूर स्थित मुरेरगढ़ तक केल्हारी–चुटकी–भंवरखोह मार्ग से पहुँचा जा सकता है। पर्वत शिखर पर प्राचीन किले के अवशेष आज भी मौजूद हैं। पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग के नोडल अधिकारी और इतिहासकार डॉ.विनोद पांडेय के अनुसार पूर्ववर्ती शासक बालंदशाह राजा द्वारा निर्मित गढ़ी माना जाता है। यद्यपि किला अब भग्न अवस्था में है फिर भी रियासतकालीन इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से यह स्थल महत्वपूर्ण है।

         मुरेरगढ़ की प्राकृतिक विशेषताएँ इसे और भी खास बनाती हैं। यहाँ पर्वत पर प्राकृतिक गुफाएँ, वर्षभर जलयुक्त कुआँ, प्राचीन तालाब, गुफाओं से निकलने वाला मीठा एवं पीने योग्य जल, घनी हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है।

धार्मिक दृष्टि से यह स्थल स्थानीय लोगों में सिद्ध बाबा पर्वत के नाम से प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि, नवरात्रि और दीपावली के दूसरे दिन यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के लिए पहुँचते हैं। पर्वत शिखर पर स्थापित त्रिशूल और ध्वज इस स्थल की गहरी आध्यात्मिक आस्था के प्रतीक हैं।

         दुर्गम रास्तों, रहस्यमय वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण मुरेरगढ़ नेचर टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा मुरेरगढ़ की विस्तृत जानकारी छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को भेजी जा चुकी है। आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के बाद यह स्थल भविष्य में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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