भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में अब वन विभाग से अनुमति प्राप्त व्यक्ति ही सांप पकड़ पाएंगे। इसके लिए संबंधित वन मंडल के डीएफओ अनुमति देंगे। संबंधित व्यक्ति को सर्प विशेषज्ञ होने का प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था सर्पा योजना के तहत की जाएगी। दक्षिण भारत के कई राज्यों में ऐसी योजना चल रही है। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश में एक मानक प्रक्रिया तय की जाएगी और सांप पकड़ने वालों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में लिए फैसले के बाद मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने वन विभाग को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। दरअसल, वर्षा काल में नगरीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सांप निकलते हैं। इनकी वजह से रहवासी आतंकित भी हो जाते हैं। मदद के लिए सर्प पकड़ने में दक्ष लोग बुलाए जाते हैं लेकिन इनके पास न अनुमति होती है न ही किसी तरह का प्रमाण पत्र होता है। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत बिना अनुमति सांप पकड़ना अपराध है, इसलिए वैधता सुनिश्चित करने के लिए भी यह योजना लाई जा रही है।
*नगरीय निकायों में सूचीबद्ध हैं सांप पकड़ने वाले:*
प्रदेश में सांप पकड़ने वाले कितने अनुभवी लोग हैं, वन विभाग के पास इसका कोई डाटा नहीं है। वन विभाग के पास 70 वन रक्षक सर्प विशेषज्ञ हैं। हालांकि, नगरीय निकायों में सांप पकड़ने वाले सूचीबद्ध हैं। इनका मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किया जाता है। घरों में सांप निकलने पर आम लोग इनसे ही संपर्क करते हैं। ये लोग शौकिया या फिर सांपों के प्रति रुचि होने के कारण यह कार्य करने लगे हैं। वन विभाग इन्हें भी सांप पकड़ने का प्रशिक्षण देकर प्रमाण पत्र देगा। देश के दक्षिणी राज्यों में सर्पा योजना संचालित है। इसे ही आंशिक बदलाव के साथ मध्य प्रदेश में लागू करवाया जाएगा। इस योजना में इच्छुक व्यक्तियों को सांप पकड़ने से लेकर जंगल में छोड़ने तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शहर और कस्बे के अनुसार ऐसे लोगों का मोबाइल नंबर व पता सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित किया जाएगा- सुभरंजन सेन, वन बल प्रमुख, मध्य प्रदेश।







